सुबे में शिक्षकों की बहाली के उपरांत शिक्षकों की भारी कमी।

0
80

बिहार राज्य में अभी तत्काल शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है 94000 नियोजित शिक्षकों की बहाली करनी है। परंतु सरकार इस कार्य में भी विफल दिख रही है क्योंकि जिस प्रकार से नियोजित शिक्षकों की बहाली की जा रही है। वैसे परिस्थितियों में लग नहीं रहा है कि शिक्षकों की पूर्ण बहाली हो पाएगी। और इन परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षक अभ्यार्थियों ने फॉर्मर अंचल में जाकर जमा तो कर दिया परंतु फॉर्म जमा होने के के बाद मेधा सूची भी जारी की गई। वह भी त्रुटि पूर्ण रहा क्योंकि ऐसा देखने के बाद यह पता चलता है। कि त्रुटिपूर्ण के बावजूद शिक्षक की बहाली संभव नहीं है फिर भी बहाली की जा रही है। सरकार एवं मंत्री वहां डटे हुए हैं विभाग बैठी हुई है। परंतु कार्य पूर्ण होना संभव नहीं दिख रहा है क्योंकि अपने नियमों के अनुसार विभाग 1 दिन में काउंसलिंग कराने का जो तरीका अपनाया है इससे संभव नहीं लग रहा है। पूरा होना क्योंकि जब तक शिक्षक पहुंचेंगे नहीं शिक्षक अभ्यर्थी पहुंचेंगे नहीं तब तक किस प्रकार से काउंसलिंग कराया जा सकता है। किसी ना किसी एक ही जगह अभ्यार्थी पहुंच पाए जिससे यह कमी रह गई थी।

आज भी सीट खाली की खड़ी रह गई और बहुत सारे ऐसे शिक्षक अभ्यर्थी जो फर्जी तरीके से अपना फॉर्म फिल अप कर भरकर और काउंसिलिंग भी करा लिया। अब जब उनकी सर्टिफिकेट की जांच हो रही है इस जांच में देखा जा रहा है। कि एक ही प्रमाण पत्र से अनेकों शिक्षक अपना फॉर्म भरकर काउंसलिंग करा चुके हैं। अब इनकी जांच के बाद भी सीटें खाली पड़ जाएगी। छठे चरण के नियोजन में बहुत ऐसे शिक्षक अभ्यर्थी अब तक नहीं भर पाए हैं। उनके लिए सुनहरा मौका रह गया जिसने भी इन शिक्षकों की प्रतिपूर्ति नहीं की है। अब शिक्षकों की कमी की कमी रही गई सरकार की नीति बहुत अच्छी नहीं है। अगर अच्छी रहती तो बहाली प्रक्रिया ढंग से चलता तो शिक्षक पूर्णरूपेण बहाल हो जाते लेकिन ऐसा नहीं हो सका और सुबह में शिक्षकों की कमी की कमी रह गई। शिक्षक अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन तरह-तरह के हथकंडे अपनाते रहे परंतु सरकार अपनी हठधर्मिता को छोड़ अच्छे तरीके से बहाली करने के बजाए अपने नियम को बार बार बदलकर शिक्षक अभ्यर्थियों को परेशान करना उनकी और उनके सरकारी नीति को बता रहा की सरकार की क्या मांगता है। और सरकार क्यों नहीं अच्छी तरीके से सरकारी विद्यालयों को संचालित कैसे हो सकेगा जब सरकारी मानक 40 बच्चों पर एक शिक्षक बना हुआ है। तो फिर क्यों नहीं शिक्षक की बहाली कर इस प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बार-बार यह आश्वासन देते रहते हैं।

कि हमने शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ कर रहा हूं तो क्या अब बगैर शिक्षक का यह संभव है शिक्षकों को 11 अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन ज्ञापन तरह-तरह के हथकंडे अपनाने पड़ते हैं। तब जाकर शिक्षकों को थोड़ा बहुत प्राप्त होती है आप अभी देख रहे होंगे शिक्षकों को समय से वेतन भुगतान नहीं हो पा रहे हैं। उन्हें जो मिलनी चाहिए वह भी नहीं मिल पाती है तो आप समझ सकते हैं। यह शिक्षक इस परिस्थिति में अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। विद्यालयों में बच्चों को मध्यान भोजन योजना संचालित कर शिक्षक उसी मध्यान्ह भोजन योजना में लगे रहते हैं। और जबरन शिक्षकों को मध्यान्ह भोजन योजना में लगाकर उन्हें तरह-तरह के अपमानित एवं विसंगति को सामना करना पड़ता है। कुछ दिन पहले आपने सुना होगा कि एक शिक्षक को निलंबित कर दिया गया। मध्यान्ह भोजन योजना को लेकर जब विभाग कहती है कि शिक्षक मध्यान्ह भोजन योजना के बोरों को बेचकर पैसा जमा करेंगे। खाते में तो शिक्षक जब बुरा बेचने जाते हैं तो उन्हें विभाग को अपमानित कह कर उन्हें निलंबित कर दिया जाता है। कि विभाग की सम्मान को ठेस पहुंच रहे हैं जब आप कहते हैं। एक तरफ के बोरा बेचकर ₹10 प्रति बोरा के हिसाब से खाते में जमा करना है तो शिक्षक किस प्रकार बेचेंगे इस कार्य से शिक्षकों को मुक्ति मिलनी चाहिए।

ताकि शिक्षक अपने कार्यों का निर्वहन सही तरीके से कर सके जब तक शिक्षकों को इन गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग नहीं किया जा सकेगा। तब तक शिक्षक विद्यालय में कैसे शिक्षण कार्य कर सकेंगे। बार-बार शिक्षक संघों ने सरकार को ज्ञापन देती है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखा जाए सरकार ने आश्वासन देती है कि हां सर शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से अलग रखा जाएगा। तो फिर सरकार विभाग के माध्यम से शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में क्यों लगा देती है। सरकार ने शिक्षकों के विद्यालय से बाहर चुनाव कार्य जनगणना कार्य मि लगाकर शिक्षकों को रिमूव कर दिया जाता है। और उन्हें गर्मियों का भी सामना करना पड़ता है हम शिक्षक अभ्यर्थियों के पास सरकार के आदेश के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। शिक्षक अभ्यर्थी फिर अपने तैयारियों में लग जाएंगे चाहे वह जिस विधि से हो शिक्षकों के पास कोई दूसरी उपाय नहीं है। जिस प्रकार शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने नियोजित शिक्षकों की बहाली को लेकर तरह तरह के बयान देते जा रहे हैं।

इससे शिक्षक अभ्यर्थी में भारी आक्रोश उत्पन्न हो रही है विद्यार्थी विद्यार्थी अपने पढ़ाई के दौरान शिक्षक की नौकरी पाने के ख्याल से अपने शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाने के लिए रात दिन प्रयास कर डी एल एड बी एड की कोर्स पूरा करने के बाद टीईटी एसटीईटी सीटीईटी का कोर्स पूरा कर शिक्षक बनने के ख्याल से अभ्यर्थियों ने कड़ी मेहनत कर तैयार किया। और जब नौकरी लेने की समय आई तो मंत्री से लेकर विभागीय अधिकारियों ने इतने सारे नियम कानून बना दिए कि अभ्यार्थी परेशान हो गए अंतर्गत वा शिक्षक बहाली काउंसिलिंग का कार्यक्रम शुरू हुआ और अधिक से अधिक सीट खाली की खाली रह गई। जब एक ही समय में एक ही तिथि पर सभी जगह काउंसिलिंग की जाएगी। तो अभ्यार्थी किसी एक ही सेंटर पर अपना उपस्थित होकर सरकार के निर्देशानुसार वीडियो में उपस्थित हो सकेंगे जब एक ही जगह उपस्थित होंगे तो अन्य अन्यत्र स्थानों पर आवेदन के साथ प्रमाण पत्र जमा करने का क्या औचित्य रह जाता है। आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि जब सारी मेहनत करने के बावजूद शिक्षक अभ्यार्थियों ने अपने नौकरी के लिए अंतिम मुहाने पर आने के बाद निराशाजनक स्थिति में आ जाता है। और ऐसे बहुत सारे शिक्षक अभ्यर्थी डिप्रेशन में आ जाते हैं।

Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here