सरकार ने लागू किया नया नियम समय पर संपत्ति का विवरण नहीं दिया तो रुकेगा वेतन।

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अभी-अभी सरकार नए नियम लागू करते हुए राज्य के सभी विभागों के कर्मचारियों पर आदेश जारी कर दिया है। और कहा गया है कि सभी कर्मचारी अपने प्रत्येक वर्ष अपनी चल व अचल संपत्ति और दायित्व का ब्यौरा 70% देना शुरू करें। ताकि समय पर वेतन का भुगतान हो सके लेकिन कुछ ऐसे कर्मचारी होते हैं। कि बार-बार कहने के बावजूद भी अपने चल एवं अचल संपत्ति का ब्यौरा प्रस्तुत करने में भी आनाकानी करते हैं। जिससे विभागीय कार्य शिथिल होती है और कुछ एक को लेकर वेतन का भुगतान करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समय से वेतन का भुगतान नहीं हो पाती है। जिससे कर्मचारियों को परेशानी अत्यधिक बढ़ जाती है जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। जब समय पर वेतन का भुगतान नहीं होगी तो कर्मचारियों का आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो जाएगी तो बार-बार सरकार विभाग के प्रत्येक कर्मचारी को यह आगाह करती है। कि वह समय पर संपत्ति का ब्यौरा जरूर दें जिससे उनके वेतन में किसी प्रकार की रुकावट एवं बाधा ना डाल पाए बार-बार कहने के बावजूद भी ऐसा देखा जाता है।

कि किसी किसी कर्मचारी ने अंतर्गत वा अपना संपत्ति का ब्यौरा छुपाए रखते हैं। और देना नहीं चाहते हैं ऐसे में गंभीर कदाचार मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी चलाई जाती है। जैसा कि आपने कभी कभी समाचार पत्रों में देखा होगा। कि उन विभाग के 10 या 15 कर्मचारियों का वेतन रुक गया और उन पर संपत्ति को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई। तो इन सभी से बचना चाहिए और समय पर संपत्ति का ब्यौरा विभाग को देना चाहिए ताकि सरकार भी उस दौरे को लेकर अपने विधिवत तरीके तरीके से सूची तैयार कर सके। जिससे किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े प्रशासन ने इस संबंध में प्रत्येक विभागों को विभाग के सभी अपर मुख्य सचिव प्रधान सचिव एवं विभाग के अध्यक्ष एवं सभी जिला के पदाधिकारियों को पत्र के माध्यम से यह प्रस्तुत कर आते हैं। कि शिक्षकों एवं अन्य सभी विभाग के कर्मचारियों को अवगत कराते हैं। और उसमें कहा जाता है कि प्रत्येक वर्ष 28 से 29 फरवरी तक समूह को और सभी अधिकारियों यानी ग्रेड ए बी और सी के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने-अपने सभी चल एवं अचल संपत्ति का प्रस्तुत करें 100 का नियम तो राज्य सरकार ने ही बनाया है पर ऐसा देखा जा रहा है। कि कुछ अधिकारी कर्मचारी द्वारा यह समर्पित नहीं किया जाता है।

जो बहुत ही खेद की विषय है उस पर निर्धारित समय पर संपत्ति का ब्यौरा नहीं दे पाते हैं। जिन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कदाचार मानते हुए कार्यवाही की जा सकती है तो विभाग ने कहा कि तय समय सीमा के अंदर अगर संपत्ति का ब्यौरा नहीं सुनेंगे। तो वैसे कर्मचारियों के फरवरी का वेतन रोक दिया जाए जब वेतन रुक जाएगी तो उनकी स्थिति और भी गड़बड़ हो सकती है। आर्थिक रूप से कमजोर हो सकते हैं तो ऐसी स्थिति न आए इसके लिए वह समय पर यदि संपत्ति का ब्यौरा दे दिया जाता है। तो किसी भी परिस्थिति में उनका वेतन वेतन नहीं रुक सकती है तो सीधी सी बात यह कहा जा सकता है कि जब कर्मचारी अपने समय सीमा के अंदर संपत्तियों का ब्यौरा प्रस्तुत कर देते हैं। तो निर्देशित विभाग के अनुसार उनके वेतन में किसी प्रकार की आज नहीं आ सकती है। इन के बाद भी चल अचल संपत्ति दायित्वों के विवरण नहीं सौंपी गई तो विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी जाती है। जो यह बहुत ही खेद का विषय माना जा रहा है अधिकारी और कर्मचारी को फरवरी तक वेतन देना होता है।

क्योंकि संपत्ति का ब्योरा भी इसी मंथ में प्रस्तुत करना होता है। सामान्य प्रशासन ने कहा ऐसा नहीं होने पर इसे गंभीर कदाचार माना जाएगा और उनके सेवाकाल में किसी प्रकार की ऐसी स्थिति में शिकायत मिलने पर या उनके सेवा पुस्तिका में लिखा जाने पर आगे चलकर उनके सेवानिवृत्ति के समय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि राज्य सरकार या केंद्र सरकार किसी भी परिस्थिति में जितने भी सरकारी सेवक हैं या ग्रेड ए हॉबी हो या सी हो किसी भी ग्रेड के कर्मचारी या अधिकारी को यह कर्तव्य होता है। कि वित्तीय वर्ष समाप्ति के पहले यानी 31 मार्च से पहले 28 से 29 तारीख के बीच में अपने संपत्तियों का ब्यौरा प्रस्तुत कर देना होता है। ताकि महा फरवरी का वेतन भुगतान नियम संगत के अनुसार तय सीमा में भुगतान कर दिया जा सके। क्योंकि कुछ शिक्षकों ने या किसी भी कर्मचारी ने अपने इस अवधि में कुछ लोन भी सेंशन कराते हैं। जिससे उनके संपत्ति में इजाफा होती है तो इसकी ब्यौरा भी उन्हीं कर्मचारियों को देना होगा देखा जाता है। कि अक्सर कर्मचारी अपने कर्तव्य का पालन करते करते इधर उधर भटक जाते हैं गलत तरीके से पैसे की उगाही करने लगते हैं।

और अपने संपत्ति में अचानक काफी वृद्धि हो जाती है जिससे विभाग भी बहुत शक में पड़ जाती है मान लिया जाए किसी भी कर्मचारी का अगर मासिक वेतन भुगतान ₹50000 होता है। तो वैसे परिस्थिति में वित्तीय वर्ष में उन कर्मचारी ने ₹600000 वेतन उठाए और वर्ष में उनके संपत्ति में अचानक एक करोड़ की इजाफा हो जाता है तो इन परिस्थितियों में देखा जाता है। कि वो एक्स्ट्रा धन की प्राप्ति कैसे और कहां से प्राप्त किए हैं। कुछ ऐसे कर्मचारी होते हैं अपने कर्तव्य पर रहते रहते भटक जाते हैं और इधर उधर कर धन का इकट्ठा करने लगते हैं। जबकि किसी भी कर्मचारी के घर में अगर ₹50000 मासिक वेतन होती है तो करीब-करीब उनके घर में 40000 से लेकर 45000 तक कि खर्चा जाती है। फिर वह कर्मचारी किस प्रकार धन की उगाही करती है जो अपने वित्तीय वर्ष में वेतन से अत्यधिक धन का उगाही कर लेता है। तो वैसे कर्मचारी समय पर अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने में हिचकते हैं। और देने से डरते हैं कि वह इतने ध्यान कहां से प्राप्त कर लिए जब हमारे पास इनकम 10,000 है तो हम वर्ष में 120000 धन उपार्जन करते हैं।

तो 10 लाख की संपत्ति हमने कैसे बना ली इन कर्मचारियों को संपत्ति को ब्यौरा देने में कठिनाई होती है जिस कारण से उनके वेतन महा फरवरी में नहीं बन पाती है। और उन पर कदाचार का आरोप लगाकर उन पर कार्रवाई भी शुरू कर दी जाती है। जिससे विभाग के साथ-साथ उन कर्मचारियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग जाती है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए और उन्हें अपने सेवाकाल के प्राप्त धनराशि से अर्जित संपत्ति का पूर्ण रूप से द्वारा प्रस्तुत सरकार एवं विभाग के समक्ष कर देनी चाहिए।

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