सरकार द्वारा महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा के बाद कर्मचारियों के साथ शिक्षकों में खुशी की लहर।

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केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य कर्मचारी नियमित एवं नियोजित शिक्षक के साथ-साथ अन्य सरकारी कर्मियों की महंगाई भत्ता को लेकर सरकार द्वारा लाया गया निर्णय से कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। क्योंकि बीते 2 वर्षों से कोरोनावायरस महामारी को लेकर आमजन परेशानियों का सामना करते करते थक नहीं रहे हैं। और कोरोनावायरस की कहर लगातार देश पर उमरी हुई है। कतिपय कारणों से केंद्रीय एवं राज्य कर्मियों के तीन किस्त से महंगाई भत्ता फ्रीज कर दिए गए थे। जिसे खोलने के बाद कर्मचारियों में खुशी आ गई है। परंतु खुशी की बात एक और बढ़ गई है कि अब कर्मचारियों को यानी हाउस रेंट में भी बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसा इसलिए कि जब महंगाई भत्ता 17 फ़ीसदी से 28 फ़ीसदी हो जाने के बाद नियम संगत के अनुसार जब 25 फ़ीसदी से ऊपर महंगाई भत्ता चली जाती है।

तो हाउस रेंट में भी बढ़ोतरी हो जाती है। ऐसा पहले से निर्णय लिया जा चुका है। कर्मचारियों को तीन किस्त का महंगाई भत्ता एरियर के साथ भुगतान होगा। जिससे कर्मचारियों की सैलरी काफी मोटी रकम हो जाएगी। ऐसे विभिन्न संकल्पना उसे कर्मचारियों को सामना करते हुए 2020 के मार्च महीने से लगातार वैश्विक महामारी कुरोना संक्रमण को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया। जिससे देश की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। आर्थिक स्थिति से उबरने के लिए सरकार ने सभी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता फ्रीज कर दिया। ताकि इन पैसों से आर्थिक स्थिति सुधारा जा सके। इसको देखते हुए सरकार पुनः 2 वर्षों के बाद हल्ला कि आज भी करो ना का स्थिति देश में अच्छी नहीं है। हालात अभी भी बिगड़ी हुई है। परंतु सरकार ने अपना निर्णय सुनाते हुए कर्मचारियों को डीए देने का घोषणा कर डाला।

अब रही बात राशि भुगतान की तो सभी कर्मचारियों को राशि आवंटन का इंतजार है और वेतन निर्धारण को लेकर सभी कर्मचारियों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि जिस नियम संगत से महंगाई भत्ता पर से हटाया गया। लॉक तुरा गया उस नियम संगत से वेतन निर्धारण नियमावली के अनुरूप संगत नहीं बैठ रहा है। तो ऐसी परिस्थिति में कर्मचारियों के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। अब इस समस्याओं के समाधान के लिए कर्मचारी एक दूसरे के टकटकी लगाए बैठे हैं और सरकार जिस तरह अपनी फैसला सुना देती है। उस प्रक्रिया से कार्यों का संपादन नहीं किया जाता है। फिर भी कर्मचारी यह आस लगाए हुए अपने कार्यों पर इमानदारी पूर्वक कर्तव्यनिष्ठ होकर कार्यों में लगे रहते हैं’, और आगे भी करना चाहते हैं। जिस समय सभी कर्मचारियों को जहां मात्र सेवंथ पे वेतन आयोग के अनुसार 5.27 के अनुरूप में बनाया गया। वैसे परिस्थिति में कर्मचारी तो नाखुश थे फिर भी कर भी क्या सकते थे।

ऐसा स्थिति बन गया था सरकार बदल चुकी थी कर्मचारी कुछ कर नहीं सकता था। सरकार अपने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना ली विपक्ष विपक्ष लायक भी नहीं रहा और विपक्ष की इतनी स्थिति खराब हो गई कि आज 6 वर्ष बीतने के बाद भी 7 वर्ष बीतने के बाद भी विपक्ष को होस नहीं आ रहा है और वह उठ नहीं पा रहा है। ऐसे विषम परिस्थिति में कर्म कर्मचारियों को इस हठधर्मिता सरकार का सामना करना पड़ रहा है। इसके पिछली सरकार ने पेंशन खा गया और वर्तमान सरकार नौकरी देने से गई सरकार नौकरी देने की वादा करती है लेकिन चुनाव समाप्त होते हैं। नेताओं ने नौकरी देना भूल जाती है। लगातार बयानबाजी के बाद अपने कार्यों पर खरा नहीं उतरता है पिछली सरकार कर्मचारियों के हित में कार्य करती थी वर्तमान सरकार सरकारी कर्मियों के हक में फैसला देने से हिचकी जाती है। जबकि कर्मचारी अपने पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ अपने कार्य पर उपस्थित होकर निर्वाहन करते रहते हैं आज महंगाई भत्ता 17 से 21, 21से 24, 24 से 28 फ़ीसदी महंगाई भत्ता बढ़ने के कर्मचारियों के हाथ खाली पड़े हैं।

इस 17 से लेकर और 28 के बीच के महंगाई भत्ते का एरियर मिल पाएगा या नहीं यह कहना बड़ी मुश्किल होगी। लेकिन फिर भी आशा तो आता ही है कर्मचारी आशा लगाए बैठे हैं कि सरकार देगी अब देगी कब देगी देगी। ऐसी परिस्थिति में कर्मचारी अपने परिवार के साथ पैसे का इंतजार करते रहते हैं। महंगाई भत्ता के साथ-साथ सरकार द्वारा चलाए जा रहे प्रोविडेंट फंड भविष्य निधि में सरकार ने नियोजित शिक्षकों के साथ भी सोतेला पर व्यवहार करते हुए 25 परसेंट ईपीएफओ के खाते में जमा की जाती है। जिसमें आधे सरकार और आधे कर्मचारी के वेतन से मिला कर किया जाता है। जबकि कर्मचारी द्वारा ₹2300 प्रति माह सरकार कितनी डालती है इसकी कोई हिसाब-किताब पता नहीं चलता। सरकार ईपीएफओ में क्या डाल रहे हैं कब डाल रही है कितना डाल रही है। इसका कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है। लेकिन ऐसा अक्सर देखा जाता है की सरकार जब ऐलान कर दी है तो देखी है। शिक्षकों की महंगाई भत्ता को लेकर सरकार अपने कानों में तेल डाल कर सो गई है।

शिक्षकों की समस्या सरकार नहीं देखना चाहती है शिक्षक अपने समस्याओं को लेकर भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। अपने परिवार को सही ढंग से नहीं चला पा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में शिक्षक शिक्षण कार्य कुशलता पूर्वक कैसे कर सकते हैं। सरकार को इन समस्याओं का समाधान निकालनी चाहिए कोरोनावायरस महामारी से सभी को बचना है। सभी का आर्थिक स्थिति कमजोर हो चुकी है। ऐसे परिस्थितियों में सरकार केवल अपने वित्तीय स्थिति को कमजोर कह कर सरकार के वित्तीय को मजबूत कर रही है। और राज्य कर्मियों की स्थिति को न देख कर अनदेखा करना कर्मचारियों के भावना को भी समझना चाहिए। जिससे कर्मचारी कर सकें ऐसा देखा जा रहा है कि राज्य कर्मियों में नियोजित शिक्षकों की कम वेतन होते हुए भी सरकार के सभी तुगलकी फरमान को मानते हुए चुनाव कार्य हो जनगणना कार्य हो या अन्य प्रकार की कार्य हो हर अन्य कार्यों में केवल शिक्षकों को लगाकर अपनी कार्य को पूर्ण करा लेते हैं।

परंतु शिक्षक के भावना को नहीं समझ पाते हैं ऐसा करना सरकार की कौन सी बात देता है। कौन सी समस्या आ जाती है कि कर्मचारियों को शिक्षकों को महंगाई भत्ता रोककर सरकार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है। सरकार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए क्या कर्मचारियों का वेतन रोक ना कहीं से उचित लग रहा है। अगर कर्मचारियों का वेतन रुकता है। भत्ता रूकती है तो क्या कर्मचारी मन लगाकर अपने कार्यों को संपादित कर सकेंगे।

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