संबद्ध डिग्री कॉलेज के शिक्षकों एवं कर्मियों के वेतन के लिए राशि का हुआ आवंटन। 

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राज्य के संबद्ध डिग्री कालेज एवं अनुदानित विद्यालयों के राशि का राज्य सरकार ने आवंटन करने का किया फैसला। कैबिनेट से भी मिल गई मंजूरी। करीब 4 वर्षों से शिक्षकों ने अपने अनुदानित राशि का आवंटन के लिए सरकार के कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे। बार-बार अनुरोध करने के पश्चात सरकार ने उन्हें अनुदान देने का फैसला लिया है इन कॉलेजों में जो भी कार्यरत शिक्षक शिक्षा कर्मी कर्मचारी सफाई कर्मी चतुर्थवर्गीय कर्मी सभी को अनुदान के रूप में वेतन का भुगतान किया जाता है। जब बच्चे अच्छे श्रेणी से उत्तीर्ण होते हैं तो कालेज के कर्मचारियों शिक्षकों की कार्यशैली के अनुरूप उन्हें अनुदान की राशि प्रदान की जाती है। अच्छे परफॉर्मेंस देखते हुए सरकार ने उन्हें अनुदान देती है जिससे सभी कर्मियों को मानदेय का भुगतान हो पाती है। लेकिन शिक्षक अनुदान तो प्राप्त कर लेते हैं लेकिन उनके इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ नहीं हो पाती है। जिससे अक्सर देखा गया है कि शैक्षणिक माहौल नहीं बन पाते हैं। तो सरकार को इस पर भी ध्यान देनी चाहिए जो इस कॉलेज के सचिव एवं अन्य मेंबर बनाए जाते हैं। उन्हें भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए किसी बच्चे के भविष्य से नहीं खेलने चाहिए और उन्हें समुचित व्यवस्था के साथ बच्चों को ज्ञान प्रदान करनी चाहिए। ताकि उस स्कूल से बच्चे पास हो कर जब निकले उत्तीर्ण होकर जाएं तो उन्हें किसी प्रकार की समस्या से नॉलेज है। वैसे परिस्थिति में सरकार समय-समय पर अपनी योजनाएं चलाती रहती है। लेकिन अनुदानित कॉलेज या स्कूल उनके निर्देश के अनुसार पूर्णरूपेण काम नहीं कर पाते हैं जबकि ऐसी नहीं होनी चाहिए। परंपरागत रूप से इस परिस्थिति को सुदृढ़ करने की कोशिश करनी चाहिए अनु समस्याओं को देखते हुए सभी प्रकार के शैक्षिक संस्थान सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त कालेजों को सरकार तरह-तरह की योजना देती है। उस के माध्यम से भी विद्यालयों में कालेजों में राशियों का आवंटन होता है। उस राशि से बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन कालेज के वरीय अधिकारियों ने इन सभी को अनदेखी कर देते हैं। समुचित व्यवस्था देंगे बच्चों को उसके सुख सुविधा देंगे तो हमारे बच्चे जरुर आगे बढ़ेंगे इसमें कोई दो राय नहीं है। ताकि सरकार भी कालेजों को मदद करती है फिर भी बच्चों से एवं बच्चे के अभिभावकों से 40 वैसे ही से ज्यादा लेते हैं। वसूलते हैं जो कि ऐसा नहीं होनी चाहिए इन समस्याओं से भी छात्र गुजरते रहते हैं। बहुत सारे समस्याओं का सामना करना पड़ता है जो बच्चे उनके अनुरूप पहुंचते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं। तो कर्तव्य होता है कि उन्हें समुचित शिक्षा प्रदान दें लेकिन ऐसा कुछ ही करते हैं जो कि यह सरासर गलत है जब सरकार सारी व्यवस्थाएं देती है। तब तब विद्यालय समिति को प्रदान करने में क्या आपत्ति होती है फिर भी इसको छात्र एवं अभिभावक करते हुए अपने कार्यों को करते रहते हैं। और बच्चे के प्रति शिक्षकों का आभार व्यक्त करते रहते हैं जबकि शिक्षकों के होना चाहिए। कि उनके सही तरीके से बच्चों को ज्ञान प्रदान की जाए जब शिक्षकों की राशि का आवंटन हो ही गया है तो उनके वितरण के लिए भी जो कालेज के समितियां होती है। वह अपने मनमाने तरीके से शिक्षकों को मानदेय का भुगतान करते हैं ऐसा नहीं होनी चाहिए। और सरकार यह भी लागू करें जो शिक्षक कॉलेज में अच्छे से अपने कार्य का निर्वहन करते हैं वैसे शिक्षकों एवं कर्मियों के आरटीजीएस या सीएफएमएस के माध्यम से उनके खाते में राशि का स्थानांतरण करें जिससे बीच में किसी प्रकार की बिचौलियों का सामना शिक्षकों को नहीं करना पड़े। ऐसा करने से शिक्षकों को मान सम्मान मिलेगी और वह अपने कर्तव्यों का शत-प्रतिशत निर्वाहन करते रहेंगे। जब उन्हें वेतन या मानदेय सा समय भुगतान होगा तो शिक्षक भी अपने कर्तव्यों का निर्वाहन शत-प्रतिशत करेंगे। और बच्चों के बीच मधुर एवं शिक्षण संस्थान में बच्चों के बीच ज्ञानार्जन का ध्यान आकृष्ट करेंगे तब जाकर हमारे राष्ट्र का सच में निर्माण होगा और बच्चे ज्ञान अर्जन करेंगे सरकार आज या कल तो आवंटन कर के शिक्षकों को मानदेय दे ही देती है। परंतु अगर यही मानदेय समय से मिले तो शिक्षकों को भी वर्ग में बच्चों के साथ समय देने में आनंद आएगा पढ़ाने में आनंद आएगा। और मन लगाकर बच्चों पर ध्यान भी देंगे जिससे बच्चों की समग्र विकास हो सकेगी और उन्हें अन्य कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। जैसा कि आप समझ सकते हैं। जब उन्हें आर्थिक तंगी होती है तो वह धरना पर बैठ जाते हैं। क्या धरना पर बैठ जाने से शिक्षण कार्य सफल हो सकती है बिल्कुल नहीं तो इन सभी परिस्थितियों को सरकार को समझना चाहिए और ध्यानाकर्षण के लिए शिक्षकों को सर समय वेतन का भुगतान करना चाहिए। संबद्ध डिग्री कॉलेज के संबंध में सरकार भी कटिबद्ध होते हैं। और अपने योजना के मुताबिक विद्यालयों और कालेजों को समय से राशि का भुगतान नहीं कर पाते कुछ राजनैतिक तौर तरीके के वजह से भी इन संबद्ध डिग्री कालेज यानी प्राइवेट तरीके से चलाए जाने को लेकर भी सरकार इस पर थोड़ा मेहरबान तो होती है। लेकिन बच्चों के जीवन से खेलना नहीं चाहिए उनके जीवन की ज्ञानार्जन के लिए संजोए हुए मनसा को भी समझना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ देखा जाता है। बार बार समझाने के बावजूद विद्यालय की समितियां अपने अस्तर से ही चलाया करती है सरकार बार-बार निर्देश देती है। और वह तौर-तरीके में अंतर करने के लिए निर्देश देती है लेकिन संबद्ध डिग्री कॉलेज के समितियां अपने अनुरूप चलाती है। और वह चाहती है कि अपने मन मुताबिक ही सिस्टम चलते रहे जिससे अपने और अपने निकट संबंधी को उस कॉलेज में जगह देते हैं ताकि अपने मन मुताबिक चलाते रहें लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। क्योंकि सभी एक समान वर्ग के लोगों को इसकी व्यवस्था होनी चाहिए और बच्चों में समग्र ज्ञान की उपार्जन के लिए एक व्यवस्था होनी। चाहिए जो कि ऐसा नहीं होता है तो सामाजिक अभिप्राय में यह देखा जाता है कि लोग अंदर से दुखी रहते हैं। फिर भी ज्ञान प्राप्ति करने के लिए वह अन्यत्र कुछ बोलना पसंद नहीं करते हैं। तो इस पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए देखनी चाहिए यह कालेज किस परिस्थिति में चल रही है। इसके लिए सुधार की क्या आवश्यकता है उस पर जरूर ध्यान देना चाहिए। जिससे समाज में सभी वर्ग के छात्र छात्राओं का पूर्णरूपेण विकास हो सके।

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