शिक्षा मंत्री ने फिर काउंसलिंग करा कर शिक्षकों की बहाली का लिया निर्णय।

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बिहार के वर्तमान शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सरकार की नई गठन होने के बाद सबसे बड़ा भाड़ शिक्षा मंत्री के कन्धों पर शिक्षकों की बहाली पिछले सत्र में ही सतीश कुमार ने यह राज्य के नागरिकों से वचन दिया था। कि मेरी सरकार बनेगी तो हमने राज्य में 94000 शिक्षकों की बहाली करूंगा। जब सरकार बन गई नए शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी को मनोनीत किया गया। मंत्री पद पर आसीन कराई गई वर्तमान शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 94000 नियोजित शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दिया। जब पूरे राज्य में सभी नियोजन इकाई ने मेधा सूची जारी कर दिया। मेधा सूची जारी करने के उपरांत हाईकोर्ट में दिव्यांग शिक्षकों की याचिका दायर की गई जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। और सरकार से यह पूछ डाली क्या आपने दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए क्या सोचा है। ऐसी परिस्थिति में राज्य में शिक्षकों की बहाली प्रक्रिया जस के तस रुक गई। अंततः सरकार के सचिव ने दिव्यांश शिक्षकों की याचिका पर अपनी तरफ से प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट से आग्रह किया। कि हमें कुछ दिनों का मोहलत दिया जाए। हमने दिव्यांग शिक्षकों की भी आवेदन लेकर उन्हें भी काउंसलिंग में उपस्थित होकर उन्हें भी बहाली करने का प्रक्रिया करूंगा। अंतता हाई कोर्ट के निर्णय के बाद सरकार ने फिर से दिव्यांग शिक्षक बहाली को लेकर अपना अल्टीमेटम निकालकर सभी दिव्यांग अभ्यर्थियों से आवेदन लेना शुरू कर दिया।

यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद मेधा सूची तैयारी के उपरांत काउंसलिंग का तिथि तय किया गया। राज्य के सभी जिलों के नियोजन इकाइयों में काउंसलिंग का तिथि तय करने के बाद शिक्षा निर्देशक रणजीत कुमार सिंह ने काउंसिलिंग की प्रक्रिया विभागीय निर्देशानुसार प्रारंभ कर दिया। पहले चरण में 94000 शिक्षकों की बहाली में दिव्यांग शिक्षकों की बहाली के साथ-साथ सामान्य शिक्षकों की भी बहाली की प्रक्रिया कराई गई। परंतु लाख कोशिश के बाद 94000 शिक्षकों की बहाली में 60% के आसपास है। काउंसिलिंग प्रक्रिया के अनुसार आज ऐसी स्थिति बन गई बन गई हुई है। कि किसी किसी नियोजन इकाई में 10 शिक्षक के जगह पर 12 शिक्षक काहे काउंसलिंग हो सका इसका सबसे प्रमुख कारण यह रहा विभागीय एवं शिक्षा मंत्री के आदेशानुसार 1 दिन में एक तिथि पर सभी जगह काउंसलिंग कराने के उपरांत यह स्थिति उत्पन्न हो गई। कि 70% भी शिक्षक की बहाली प्रक्रिया पूर्ण नहीं की जा सके शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने यह निर्णय लिया। शिक्षक की बहाली पूर्ण होने चाहिए और योग्य शिक्षक अभ्यर्थी नहीं बैठेंगे। उन्हें काउंसलिंग करा कर उन्हें शिक्षक बनाई जाएगी। और शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने फिर एक पत्र जारी किया। और शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी के साथ विभागीय आला अधिकारी ने कौन से लिंग की प्रक्रिया पूरी करने पर कटिबद्ध है। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 15 अगस्त 2021 को नियोजित शिक्षकों के साथ किया गया।

वादा के अनुसार 15% वेतन वृद्धि का भी उन्होंने चर्चा करते हुए केंद्र के अनुसार जिस प्रकार केंद्र ने अपने कर्मचारियों को 28% महंगाई भत्ता देने का निर्णय लिया उसी प्रकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में कह दिया। मैं भी अपने राज्य के सभी कर्मचारियों को 28% महंगाई भत्ता देने का वादा करते हैं। और इसे विभागीय सचिव के द्वारा या निर्णय लिया गया कि शिक्षक एवं कर्मचारियों को 28% महंगाई भत्ता मां सितंबर के वेतन के साथ भुगतान किया जाएगा। लेकिन योजित शिक्षकों को 2020 में मुख्यमंत्री की सरकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ही सरकार थी। और उन्होंने यह वादा किया कि आप लोग हड़ताल से वापस जाएं हम 15% आप को एकमुश्त वेतन वृद्धि करेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए लेकिन आज दूसरा साल शुरू हो गया। परंतु सरकार अभी तक 15% वेतन वृद्धि की घोषणा करने के बाद भी वेतन वृद्धि का लागू नहीं किया इससे यह पता चलता है कि सरकार कितने निरंकुश और हट धर्मी सरकार है। जब सरकार नियोजित शिक्षकों को उनकी मांग की पूर्ति नहीं करेंगे तो शिक्षक अपने कार्य पर किस तरह से शिक्षकों की बहाली मैं अवरुद्ध होने से शिक्षक अभ्यर्थी काफी आक्रोश व्यक्त करते रहते हैं। धरना प्रदर्शन करने के बाद सरकार सुनती है जब तक शिक्षक अभ्यार्थियों ने आंदोलन नहीं कर पाते हैं।

तब तक सरकार बिल्कुल नहीं सुन पाती है नियोजित शिक्षक बनने के लिए अभ्यार्थियों ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए तब जाकर नीतीश कुमार सोनी फिर राज्य में नियोजित शिक्षकों की बहाली की गई। जब नियोजित शिक्षक धरना प्रदर्शन हड़ताल करते हैं तब नीतीश जी आकर कहते हैं कि हम आप लोगों को नियोजित नहीं केवल और शिक्षक मानते हैं। जरा नीतीश जी यह बता दें। कि जब वेतन भुगतान के लिए राशि आवंटित होती है। तो फिर पत्र में नियोजित या संविदा शब्द का प्रयोग क्यों किया जाता है। जब संविदा और नियोजित शब्द के साथ पत्र जारी होती है आवंटन राशि का तो फिर मुख्यमंत्री जी द्वारा शिक्षक शब्द का प्रयोग कर नियोजित ना कह कर क्या साबित करना चाहते हैं। जब ऐसा ही बात है तो एक लाइन में सभी सभी कैडर के नियोजित शिक्षकों को एक समान मानकर सभी को शिक्षक का दर्जा देकर राज्य कर्मी का दर्जा के साथ सभी को 8 वर्ष 10 वर्ष 20 वर्ष के पदोन्नति के साथ-साथ उनके प्रबल वेतनमान के बारे में सोचते हुए उन्हें क्यों नहीं इस प्रकार की लाभ दी जा सकती है। जब एक तरफ आपने कहा कि हम नियोजित नहीं केवल शिक्षक मानते हैं। तो फिर इन्हें ग्रुप बीमा ग्रेच्युटी एवं अन्य सुख सुविधा जैसे पहले के शिक्षकों को दी जाती है। उसी प्रकार से इन सभी नियोजित शिक्षकों को क्यों नहीं दी जा रही है आप इससे यह अनुमान लगा सकते हैं। कि जब शिक्षक अपने कार्य के प्रति समर्पित रहते हैं तब उन्हें इन सभी सुविधाओं को देने में राज्य सरकार के मुखिया नितीश कुमार जी को देने में क्या दिक्कत है उत्पन्न हो जाती है आज जो शिक्षकों की बहाली की जा रही है। इस बहाली में भी कई प्रकार की खामियां नजर आ रही है। जिससे सॉन्ग बार बार अवगत करा रही है। परंतु सरकार इसे नजरअंदाज करते हुए डालने की कोशिश करती रहती है। इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं माननीय शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी को इस आशय की जानकारी होनी चाहिए।

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