वेतनमान बाले पद पर आश्रितों को बहाली नहीं करेगी सरकार ऐसा निर्देश कर दिया जारी।

0
51

राज्य सरकार अब ऐसा नीति अपनाई है कि राज्य के राजकीयकृत प्राथमिक मध्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूलों प्रोजेक्ट विद्यालय सहित सभी सरकारी स्कूलों में अब राज्य प्रमंडल जिला संभल के अनुसार सरकारी स्कूलों में प्रधानाध्यापक शिक्षक व कर्मी की सेवा काल में यदि किसी कारण बस मृत्यु हो जाती है। तो उनके उपरांत आश्रितों को अब नियोजन नियुक्ति के लिए शिक्षा विभाग ने ऐसा जारी अधिसूचना कर दिया है। कि सुप्रीम कोर्ट के 3 अप्रैल 2017 के आदेश के अनुपालन में जारी कर दिया गया था अधिसूचना के मुताबिक 1 जुलाई 2021 से राज्य द्वारा निर्धारित नियमों के उल्लेख में प्रभाव से मुक्त  कर दिया गया। सहायक शिक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति नहीं की जाएगी ।ऐसा संवर्ग में निर्धारित किया गया है  जैसा की आप सभी अवगत हैं की प्राइमरी मध्य या माध्यमिक उच्च माध्यमिक जितने भी प्रकार के इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक होते हैं। उन्हीं शिक्षकों में से उच्च योग्यता एवं वरीय शिक्षकों के आधार पर प्रधानाध्यापक पद पर आसीन किया जाता है। लेकिन आज सरकार तरह-तरह की नियमों को लागू कर रही है जो वर्तमान में शिक्षक विद्यालय में कार्यरत हैं। उनके लिए अपमानजनक यह कार्यक्रम की जा रही है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

कि जिस कोटि के शिक्षक विद्यालय में कार्यरत हैं उससे हटकर शिक्षकों के प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापक पद पर आसीन करने के लिए कोई अलग से परीक्षा लेकर या वैकेंसी ऐसे परिस्थितियों में जो शिक्षक अब तक कार्य कर रहे हैं। वह प्रधान शिक्षक प्रधानाध्यापक पद को प्राप्त करने के लिए निराश हो चुके हैं। क्योंकि वह उच्च योगिता धारण करने के पश्चात प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापक पद पर नहीं आसीन हो सकते हैं। इन सभी समस्याओं को लेकर शिक्षक संघों ने कड़ा रुख अपनाने का अख्तियार कर लिया है। जिससे सरकार पर भारी दबाव पड़ सकती है लेकिन यह सरकार लगातार शासन कर रही है। ऐसी परिस्थिति में सरकार हठधर्मिता के शिकार होते जा रहे हैं। किसी भी विभाग की कर्मचारी कितना भी हड़ताल धरना प्रदर्शन आंदोलन कर ले परंतु सरकार अपने ही तौर तरीका से चला रही है। जो यह और संसदीय दिख रहा है। इस पर सरकार के जुड़े मंत्री एवं विभाग के वरीय पदाधिकारियों को इस पर पहल करनी चाहिए। और सरकार मंत्री शिक्षकों के अपमान होने से बचाना चाहिए पहले शिक्षकों को बेसिक ग्रेड से स्नातक ग्रेड में बिना टूट के 5 वर्ष सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षकों को स्नातक ग्रेड में पूर्ण कर दिया जाता था।

परंतु आज सरकार शिक्षकों के 18 वर्ष 17 वर्ष 15 वर्ष 10 वर्ष 8 वर्ष 5 वर्ष सभी पूरा कर लेने के बावजूद भी शिक्षकों को बेसिक ग्रेड से स्नातक ग्रेड में पूर्ण करने से इंकार कर रही है। और शिक्षकों को प्रोन्नत दिए बगैर दूसरे प्रकार से वैकेंसी बनाकर बीपीएससी के माध्यम से बहालगढ़ प्रधान शिक्षक के तौर पर सभी विद्यालयों में आसीन करना चाह रही है। ऐसा करने से शिक्षक अंदर ही अंदर घुटने लगेंगे और हतोत्साहित कर वह अपने कार्य को उचित मायने में माना जाए तो अपने कर्तव्य पर शत-प्रतिशत हासिल नहीं कर पाएंगे। जिससे बच्चों में हराश की आशंका आ सकती है सरकार को होनी चाहिए कि जिस प्रकार पहले से यह कैडर के शिक्षकों में बढ़िया तम के आधार पर प्रधान शिक्षक के पद पर आसीन किया जाता है। तो फिर यह नया नियम बनाकर शिक्षकों को दिग्भ्रमित कर अपने कार्यों में बाधा देकर सरकार क्या प्रस्तुत करना चाहती है। क्या ऐसा करने से हमारे विभाग हमारे विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे पर असर पड़ सकता है। अगर नहीं तो फिर यह करने से सरकार को क्या लाभ प्राप्त होती है। इधर सरकार ने जुलाई 2006 के पूर्व वर्ग 3 अथवा 4 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति हेतु की गई अनुशंसा के आधार पर सहायक शिक्षकों के पद पर आसीन करने की जो यह विधिवत तरीका अपनाई गई है। यह सही मायने में देखा जाए तो सरकार किस रूप में ले जा रही है सेवाकाल में मृत हेड मास्टर शिक्षक कर्मी के आश्रितों को नियुक्त की गई।

अनुशंसा के आलोक में इंटरमीडिएट प्रशिक्षण के अहर्ता तथा शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होने पर नियोजन नियमावली के आलोक में पंचायती राज संस्थानों एवं संस्थानों द्वारा शिक्षा के मूल कोटि के पद पर नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया जो जाती है यह नहीं है। जबकि वर्ष 2020 में बनाई गई नियमावली तैयार किया गया था। उस प्रकार सरकार को अपनी नियमों का पालन करते हुए और प्रोन्नत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो सका और सरकार अपनी मनमानी दिखाते हुए। इन शिक्षकों को आज तक बढ़िया तम के आधार पर पूर्व न देने से इंकार कर गया। आज कोरोनावायरस महामारी को लेकर सभी विभाग शिथिल हुए परंतु सभी विभाग आगे बढ़ते चले गए और आठ शिक्षा विभाग को इस मुकाम पर ला दिया है। कि सरकार शिक्षकों को प्रोन्नत तो दे या ना दे लेकिन उन्हें महंगाई भत्ता और वेतन बढ़ोतरी का सिलसिला को रोक दिया है आज बिहार के लगभग साढे चार लाख नियोजित शिक्षक अपने वेतन के लाले पड़ गए हैं आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब हो चुकी है।

लेकिन सरकार अपनी हठधर्मिता को छोड़ने को तैयार नहीं है ऐसा माना जा रहा है। कि सरकार किस स्थिति में शिक्षकों को ला देगी यह कहना बड़ी ही मुश्किल की बात है जब शिक्षकों को समय से वेतन भुगतान नहीं होगा। समय से उन्हें वेतन नहीं मिलेगा तो अपने आर्थिक स्थिति को कैसे सुदृढ़ करेंगे इस पर विभाग एवं सरकार को विचार करना चाहिए। जब तक इस पर विचार नहीं होगी तब तक विभाग एवं शिक्षक को सही दिशा में लाना यह बड़ा ही कठिन कार्य माना जा सकता है। जब जब शिक्षक एवं उनके परिवार का भरण-पोषण पेट पालन वस्त्र अन्य का सुख सुविधा समय पर उपलब्ध नहीं होगा। समय पर प्राप्त नहीं होगी तो शिक्षक अपने कार्य पर किस प्रकार मौजूद रहेंगे और शत-प्रतिशत अपने कार्य के प्रति निष्ठा पूर्वक अपने कार्य को संपादित करेंगे इन सभी तथ्यों को देखते हुए सरकार को अपनी नियम संगत में बदलाव करने चाहिए और शिक्षकों को भी उनके हक देना चाहिए। क्योंकि कोई भी व्यक्ति पढ़ाई कर अध्ययन कर परीक्षा देता है। और वह लाल से लेकर चलता है कि हमें भी नौकरी होगी। और जब उन्हें नौकरी प्राप्त होती है और सरकार के द्वारा दिए गए नियम और कानूनों के अनुसार उन्हें प्राप्त नहीं होती है।

Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here