राज्य में वित्त रहित हाई स्कूल एवं कालेजों के शिक्षकों कर्मियों को डीबीटी से राशि मिलेगी।

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बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया ऐलान ।कहा अब वित्त रहित हाई स्कूल और कालेजों के शिक्षकों व कर्मियों को डीवीटी के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। क्योंकि वित्त रहित शिक्षकों की बार बार आंदोलन करने के बाद शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी की नींद अब टूटी है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए संवाद दिया है कि अब वित्त रहित शिक्षक व कर्मियों को डीबीटी के माध्यम से ही राशि दी जाएगी। वैसे वित्त रहित जितने भी राज्य में हाई स्कूल और कॉलेज चल रहे हैं। उन कॉलेजों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बच्चियों के रिजल्ट के आधार पर ही अनुदान दी जाती है। जैसा कि बार-बार देखा जा रहा है कि कॉलेजों में स्नातक में जो बच्चे फर्स्ट डिवीजन से पास करते हैं।

उन बच्चों की संख्या के आधार पर प्रत्येक बच्चा ₹8500 अनुदान की राशि उपलब्ध कराई जाती है। ठीक उसी प्रकार स्नातक में जितने बच्चे बच्चियां द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण होते हैं छात्र संख्या के आधार पर ₹8000 के हिसाब से शिक्षकों एवं कर्मियों को लेकर कालेजों को अनुदान की राशि दी जाती है। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस्लाम में यह भी कहा कि जितने भी अनुदानित कॉलेज स्नातक में तृतीय श्रेणी के जो बच्चे उत्पन्न होते हैं। उनके संख्या के आधार पर प्रत्येक बच्चों पर ₹7500 के हिसाब से कालेजों को अनुदान की राशि प्रदान की जाती है। आपने पिछले कई महीनों से देखा होगा कि वित्त रहित शिक्षकों की धरना प्रदर्शन लगातार जारी रहा है। और सरकार के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने अपने कालेजों को सरकारी करण करने को लेकर बहुत से चरणबद्ध तरीके से रैली धरना प्रदर्शन जारी रखा।

परंतु सरकार पर इसका कोई असर न पड़ने के कारण वित्त रहित जितने भी शिक्षक कर्मी अपने अपने विद्यालय कॉलेज मैं फिर वापस चले गए। और अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए राज्य सरकार एवं शिक्षा मंत्री का पुतला दहन भी करते हुए कर्मियों ने अपना आक्रोश व्यक्त किया। शिक्षाकर्मी एवं अन्य कर्मी वित्त रहित कॉलेजों के तरह-तरह के हथकंडे अपनाए लेकिन सरकार को इस पर कोई असर न पड़े। और आज फिर पूर्व की भांति शिक्षक एवं कर्मी कालेज के जैसा पहले की फॉर्म भर कर बच्चों को परीक्षा ली जाती है। ठीक उसी तरह कार्य को आगे की तरह संपादित किया गया अब देखने वाली बात यह है कि अब तो गत्वा सरकार वित्त रहित शिक्षकों की बात को ना मानकर उनके पूर्व की भांति जिस तरह अनुदान के रूप में शिक्षक व कर्मियों की राशि दी जाती है।

उसी पैटर्न पर फिर सरकार ने अपना निर्णय लेते हुए और उन शिक्षक व कर्मियों के खाते में डीवीडी के माध्यम से भेजने की प्रक्रिया जारी रखा गया है। ऐसा इसलिए देखा जा रहा है कि कई कॉलेज स्कूल ऐसे हैं जहां पर सेक्रेटरी शिक्षकों और कर्मियों से कुछ पैसे अनुदान से ले लिया करते हैं। तो इस परिस्थिति में सरकार अब शिक्षक व कर्मियों के खातों में डीवीटी के माध्यम से भेजने की प्रक्रिया अपनाई है। वैसे उन शिक्षकों और कर्मियों के लिए तो खुशियों का सौगात है। लेकिन विद्यालय कॉलेज के जितने भी सेक्रेटरी हैं। उनके लिए अब पैसे के लाले पड़ जाएंगे। अब उन्हें किस प्रकार आगे विद्यालयों का संचालन करना है। यह देखने वाली बात होगी क्योंकि जब इस सरकार ने वित्त रहित और हाई स्कूलों कॉलेजों के शिक्षकों के नियमित रूप से भी कालेज और विद्यालय को संचालन करने को लेकर मांग को ठुकरा दिया है। तब से वित्त रहित स्कूल और कालेज के शिक्षक अंदर ही अंदर टूटने लगे हैं।

क्योंकि उन शिक्षक कर्मियों की जो वित्त रहित हाई स्कूल और कॉलेजों में कार्यरत है उनके कई 1 वर्षों से अनुदान भी नहीं मिल रहा है। तो ऐसे परिस्थितियों में शिक्षक व कर्मी वित्त रहित कालेज में किस तरह से अपना ड्यूटी निभाएंगे और किस तरह अपने कार्यों का निर्वहन करेंगे। यह देखने वाली बात है क्योंकि अनुदान या वेतन जब शिक्षकों को नहीं मिलेगी। तो वैसे परिस्थिति में विद्यालय या कॉलेज कक्षा का संचालन किस तरीके से किस ढंग से शिक्षक करेंगे और कितने कार्य कुशलता के साथ करेंगे। यह देखने बाली बात है जब कक्षा लगेगी ही नहीं अगर कक्षा लगती भी है। शिक्षक नहीं आते हैं पर हमने तो बच्चे किस तरह से प्रथम या द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हो सकेंगे। कि उन विद्यालय उन कालेजों के शिक्षकों के लिए अनुदान की राशि उपलब्ध कराई जाएगी जैसा कि बताया गया है।

कि प्रथम श्रेणी के उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को 8500 द्वितीय श्रेणी उत्तीर्ण के लिए ₹8000 और तृतीय श्रेणी प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं के लिए ₹7500 की अनुदान की राशि दी जाती है। लेकिन शिक्षक व कर्मी अपने कार्य का निर्वाहन तभी करेंगे। जब उन्हें अनुदान की राशि उपलब्ध होगी क्योंकि उन शिक्षक के भी परिवार हैं बच्चे हैं अपने जीने की तरीका है। अगर उन्हें वेतन या अनुदान नहीं मिलेगी तो उनके परिवार का भरण पोषण कैसे होगा। और वह अपने कक्षा में आकर कुशलता पूर्वक अपने कार्यों का निर्वाहन किस प्रकार कर सकेंगे। यह देखने की वाली बात है कि जब अनुदानित शिक्षक दूर दराज से विद्यालय या या कॉलेज पहुंचते हैं। तो उन्हें भी भोजन कपड़ा और मकान की जरूरत है जिस तरह से अन्य शिक्षक सरकारी कर्मी सरकारी कालेजों सरकारी स्कूलों के शिक्षक अपने तरीके से अपने ढंग से जीते हैं ठीक उसी तरह बीत रहे। तो शिक्षकों को भी जीने की आवश्यकता होती है।

बच्चे सरकारी कालेज या हाई स्कूल में पढ़ते हैं उसी तरह वित्त रहित अनुदानित कालेजों में भी बच्चे बच्चियां पढ़ने आती है उन्हें भी ज्ञान की जरूरत है। अगर शिक्षक को समय से वेतन अनुदान की राशि नहीं दी जाएगी तो वह मन से कैसे कक्षा में बच्चों को पढ़ा पाएंगे। वेतन को नियमित करने के लिए शिक्षक कर्मियों ने कई तरह के आंदोलन किए लंबी आंदोलन चले लेकिन राज्य सरकार हठधर्मिता ना त्यागने की पर ले चुकी है। और राज्य के मुखिया श्री नीतीश कुमार और उनके मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इन अनुदानित शिक्षकों के लिए एक न सुनी। और उन्हें पुनः अपने कार्य पर जाना पड़ा क्योंकि जो बच्चे बच्चियां परीक्षा दिए हैं।

वह उत्तीर्ण हुए हैं उनके सर्टिफिकेट बनाना और उनके सभी तरह के प्रमाणपत्रों की तैयारी करके देना। ताकि बच्चे अगले कक्षा में अपना नामांकन ले सके ऐसे यह भी कहा जा सकता है। कि शिक्षक अनुदान की राशि लेने के लिए विद्यालय के बच्चों को प्रमाण पत्र जारी करते हैं। सरकार ने इस बार सुनी है और अपना ऐलान भी जारी कर दिया है। कि कर्मचारी और शिक्षकों को टीवी के माध्यम से उनके खाते में पैसे भेजी जाएगी। लेकिन यह खुलासा नहीं किया गया है। कि किस वर्ष की और कितनी राशि उनके खाते में डीवीडी के माध्यम से भेजा जाएगा।

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