राज्य में मध्यान भोजन योजना संचालित के लिए अब नए खाता एचडीएफसी में खुलेंगे ।

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सरकार द्वारा एसएसए अर्थात सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े सभी प्रकार की राशि को विभाग द्वारा जुलाई तक हर हाल में राशि वापसी करा ली गई है। इसी कड़ी में सरकार की एक प्रायोजित कार्यक्रम विद्यालयों में जो चल रही है। मध्यान्ह भोजन योजना जिसमें बच्चों को दोपहर के भोजन के रूप में दिया जाता है इस योजना को संचालित करने के लिए केंद्र एवं राज्य से धनराशि विद्यालयों को दी जाती थी। जो कि अब सरकार द्वारा इस राशि को वापस करा कर विद्यालय प्रधान एवं शिक्षा समिति द्वारा गठित समिति के अनुसार बैंक खातों में बची हुई राशि को जुलाई तक वापसी करा ली गई। खाता वापसी के बाद सभी विद्यालय प्रधान को यह निर्देश दिया गया था। कि आपको जिस बैंक से मध्यान भोजन योजना कार्यक्रम संचालित होती थी उस बैंक के खाते को क्लोज कर क्लोजर सर्टिफिकेट विभाग के पास समर्पित करना है। अब प्रधानाध्यापक द्वारा क्लोजर सर्टिफिकेट जमा कर देने के बाद विद्यालय के पास मध्यान्ह भोजन योजना की किसी भी प्रकार की राशि उपलब्ध नहीं है। इधर कोरोनावायरस महामारी को लेकर वर्ष 2021 से राज्य के सभी विद्यालयों को बंद कर दिया गया। पठन-पाठन ठप हो गई बच्चे विद्यालय आना बंद कर दिए सरकार के निर्देशानुसार लॉकडाउन लगाकर विद्यालय में बच्चों को आने से रोक दिया गया। अंततः सरकार द्वारा दिए गए निर्देश के अनुपालन में बीच में एक बार विद्यालय को संचालित किया गया। परंतु विद्यालय खुली बच्चे उपस्थित हुए 50% के हिसाब से परंतु विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन नहीं हो सका।

बच्चे अपने घर से ही टिफिन में लंच लेकर आते थे या वह अपने घर जाकर नाश्ता करते थे दोपहर का भोजन बंद हो गया। परंतु सरकार के निर्देशानुसार मध्यान भोजन की राशि बनाने के लिए बच्चे या उनके अभिभावक के खातों में राशि आरटीजीएस के माध्यम से हस्तांतरित किया गया। और चावल बच्चे के अभिभावक को विद्यालय में बुलाकर प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए 100 ग्राम एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए 150 ग्राम के हिसाब से अभिभावकों को वितरण किया गया। जिससे वह मध्यान भोजन की राशि एवं खाद्यान्न प्राप्त कर लिया गया। आज ऐसी स्थिति हो गई है कि विद्यालय पुनः 15 अगस्त 2021 के बाद पहली से आठवीं कक्षा के विद्यालयों को खोल दिया गया है। बच्चे भी उपस्थित हो रहे हैं 100% शिक्षक भी उपस्थित हो रहे हैं। अब जब मध्यान भोजन की बात आती है तो यहां पर सरकार ने फिर दिशा निर्देश जारी कर दिया है। विभाग के द्वारा विभाग ने पत्र भी जारी कर दिया कि अब सभी स्कूल अपने नजदीक के एचडीएफसी बैंक में जीरो बैलेंस से खाता खोलकर उसे संचालित करेंगे। सरकार ने यह यह निर्देश तो जारी कर दिया परंतु शिक्षक के बीच उहापोह की स्थिति बनी हुई है। कारण यह कि शिक्षा समिति की कार्यकाल समाप्त हो चुकी है और जब तक शिक्षा समिति का पुनर्गठन नहीं हो जाता है। तो वैसे ही स्थिति में कैसे मध्यान भोजन की खाता खोली जा सकती है कैसे संचालन किया जा सकता है।

यह विचारणीय है और विभाग को इस चीज की जानकारी देनी चाहिए। किस आधार पर खाता का संचालन किया जा सके इसी बीच देखा जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायती राज व्यवस्था के अनुसार पंचायत चुनाव में विलंब होने की वजह से जनप्रतिनिधियों का चयन नहीं हो सका है। और विभागीय आदेश के अनुसार यह नियम संगत है कि विद्यालय शिक्षा समिति में एक सदस्य जनप्रतिनिधि के रूप में वार्ड सदस्य भी रहते हैं। तो आप इसे अवगत पत्र के माध्यम से जब तक नहीं करा देते तब तक विद्यालय के खाता संचालन कैसे की जा सकती है। विद्यालय शिक्षा समिति का गठन कैसे किया जा सकता है। जब तक विद्यालय शिक्षा समिति का गठन नहीं हो जाएगा अध्यक्ष सचिव का चुनाव नहीं हो जाएगा। तब तक मध्यान भोजन योजना संचालित करने के लिए सचिव और पदेन सदस्य अर्थात शिक्षक और नवनियुक्त सचिव के संयुक्त अक्षर से हस्ताक्षर के बिना खाता का ओपनिंग कैसे हो सकती है। तो इन सारी समस्याओं को लेकर शिक्षक परेशान हैं और इधर विभाग से दबाव बन रहा है। मध्यान्ह भोजन योजना के लिए खाता एचडीएफसी बैंक में खोलना है केंद्र सरकार और राज्य सरकार के सहमति के बाद मध्यान्ह भोजन योजना सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित की जाती है। और मध्यान भोजन योजना संचालित की जिम्मेदारी इस बार उम्मीद जताई जा रही है। कि शिक्षक से नहीं कराई जाए क्योंकि शिक्षक बार-बार सरकार से आग्रह करती आ रही है।

कि शिक्षकों को पठन-पाठन से अलग हटाकर अन्य कार्यों में लगा दी जाती है। जिससे पठन-पाठन बाधित होती है बार-बार शिक्षक संघ द्वारा सरकार से निवेदन पत्र के माध्यम से कराई जाती है और सरकार बार-बार तो होती है। कि अब शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्य में भाग नहीं लेंगे परंतु सरकार की जब काम बिगड़ने लगती पीछे पड़ने लगती है। तब अंततः शिक्षकों को ही लगाया जाता है। वह जनगणना हो आर्थिक गणना हो पशु गणना हो चुनाव हो चुनाव कार्य में किसी भी प्रकार की साड़ियों में लगाकर शिक्षकों को बार-बार परेशान किया जाता है। शिक्षक बार-बार निवेदन करते रहते हैं सरकार से विभाग से और सरकार कहती है। कि अब शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाई जाएगी परंतु वक्त आते-आते सरकार अपने वादों को भूल कर और शिक्षकों को प्रतिनियुक्त कर कर कार्य में लगा देते हैं।

जो शिक्षक कार्य में नहीं पहुंचते हैं किसी कारण बस उन पर तुरत निलंबन की कार्रवाई शुरू कर जिसे लेकर शिक्षक अभिलंब कार्य में प्रतिनियुक्त होकर अपने कर्तव्य पर कायम हो जाते हैं लेकिन जब बात आती है। शिक्षकों की मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन तो करते हैं अपने कर्तव्य पर बने रहते हैं और उन्हें तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जैसे अभी कुछ दिन पहले अखबार में छपी थी। शिक्षक बोरा बेच रहे थे घूम घूम कर उनको निलंबित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है जब विभाग के द्वारा यह निर्देश दिया गया। कि चावल की बैग को ₹10 में बेच कर विभाग के खाते में जमा करना है तो फिर जब सरकार के आदेशानुसार शिक्षक बुरा बेचने गए तो उन पर तुरंत निलंबन की कार्यवाही शुरू कर दी गई यह खेद की बात है। और विभाग को इस पर संज्ञान लेनी चाहिए और यह सभी निर्देश को वापस लेनी चाहिए।

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