बिहार सरकार आंगनबाड़ी को प्राइमरी स्कूल से जोड़ने की तैयारी में है।

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अब राज्य सरकार ने एक और नया पॉलिसी तैयार करते हुए बिहार में जितने भी आंगनवाड़ी केंद्र चल रहे हैं। उनको सरकारी विद्यालय यानी प्राथमिक विद्यालय से जोड़ने की तैयारी शुरू कर ली गई है। जहां शिक्षकों की कमी है वहीं दूसरी तरफ अब आंगनबाड़ी को जोड़कर सरकार शिक्षकों के लिए और मुश्किलें बढ़ा रही है। ऐसा प्रायः देखा जाता है कि शिक्षक को विद्यालय कक्षा संचालन के अलावे तरह-तरह की गतिविधियां कराई जाती है। अन्य शैक्षणिक कार्यों में लगा कर पढ़ाई बाधित कराई जाती है। जैसे जनगणना, मतगणना, पशु गणना अन्य प्रकारों की कार्य शिक्षकों से कराई जाती है। जिससे वह कक्षा संचालन नहीं कर पाते हैं। और अपने कर्तव्य को किसी तरह बचा पाते हैं। ऐसा बार बार देखा जाता है कि सरकार राज्य में किसी भी प्रकार का चुनाव हो लोकसभा का विधानसभा का या पंचायत चुनाव किसी भी प्रकार की चुनाव हो उसमें शिक्षकों को जरूर लगा दिया जाता है।

क्योंकि सरकार भी जानती है कि सिर्फ शिक्षक अपने कर्तव्य से अलग हटकर कार्य नहीं कर सकते हैं। अपने कार्यों को पूर्ण विश्वास और कर्तव्य के साथ कार्य को पूर्ण करते हैं। इसी कारण सरकार अन्य विभाग को छोड़कर शिक्षा विभाग के शिक्षकों को ही लगा देते हैं। अंततोगत्वा शिक्षक क्या करें अपने कर्तव्य का पालन करते हुए उच्चाधिकारियों का आदेश को ऐसी परिस्थिति में पत्र प्राप्ति के पश्चात अपने कार्य पर पुनः पहुंच जाते हैं। और अपने कार्यों को संपादित करना शुरू कर देते हैं। आज कोरोनावायरस महामारी के दौड़ में शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। परंतु ऐसी परिस्थिति में भी सरकार शिक्षकों का नहीं है। और चुनाव में लगा देती है। आज पंचायत का चुनाव शिक्षकों के सर पर सवार है कोषांग में प्रतिनियुक्ति होना है। यह भी यह फ्रेश कर उसे सजा सुसज्जित ढंग से रखना विधि व्यवस्था टाइट करना। यह सभी शिक्षकों के माथे पर ही हैं और यह देखा जा रहा है कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर अब सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं।

जाएंगे वहां भी पढ़ाने अकेला शिक्षक कहां कहां जाए और स्थिति को देखते हुए सरकार शिक्षकों को आर्थिक स्थिति से भी नहीं बिगाड़ पाती है। अभी हाल फिलहाल में खबर आई है जहां लगभग 10 करोड़ से ऊपर की आवश्यकता है। वहां ऐसी परिस्थिति में गर्भवती महिला का उन्हें पोषाहार का वितरण किया जा सके। यह बड़ी समस्या है अभी शिक्षकों के साथ और आंगनवाड़ी सेविका के पास भी इसी तरह का समस्या है। जैसा कि बताया जा रहा है कि आवंटन के अभाव में आंगनवाड़ी किस तरह से अपने कार्य को संपादित करें आधे में कैसे पूर्ण किया जाए। इस पर मंथन चल रहा है और पता नहीं सरकार किस तरह से व्यवस्था चला रही है। एक तरफ जहां कहती है किसी प्रकार की कमी नहीं होने देंगे ठीक उसी प्रकार आज जरूरत की आधे आवंटन कर आंगनवाड़ी केंद्रों पर समस्या का अंबार लग गया है। तो आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि राज्य सरकार की कैसी स्थिति बन गई है। कि वह शिक्षा के क्षेत्र में पूरे नाकामी के तौर पर साबित हो रहे हैं। फिर भी सरकार में रहने वाले विधायक मंत्री गण किस प्रकार सरकार को सहयोग एवं सुझाव देते हैं।

समझ से परे हैं ऐसा प्रायः देखा अब जाग ही रहा है। कि सरकार हाल फिलहाल में सर्व शिक्षा अभियान के तहत जो भी हर विभाग में जो भी पैसा खाते में जमा थी। उससे वापस आरटीजीएस के माध्यम से करा लिया है। और खाता से क्लोजर सर्टिफिकेट भी मंगवा लिया है। जब सभी प्रकार पुराने नए पैसे सरकार के खजाने में चले गए। फिर कौन सी आर्थिक स्थिति का रोना रो रही है सरकार जो कि समय पर शिक्षकों आंगनवाड़ी केंद्रों के सहायिका सेविका प्रवेशिका का भी वेतन भुगतान समय पर नहीं कर पाती है। जब तक इन समस्याओं से जूझते रहेंगे शिक्षक शिक्षा का दीप कैसे चलाएंगे। एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कैसे कर पाएंगे सरकार अपनी हठधर्मिता को छोड़ने को नहीं तैयार है। अपने मनमानी के अनुसार राज्य के कर्मचारियों को वेतन दे रही है। वेतन बढ़ोतरी पर सरकार सुनने को तैयार नहीं और महंगाई अपने चरम सीमा पर पहुंच चुकी है इसे रोकने के लिए भारत के किसान तत्पर हैं। परंतु सरकार को किसान भाइयों पर भी ध्यान नहीं वह किस तरह अपना जीवन यापन कर अन्य का उत्पादन करते फिर भी सरकार उनकी महत्ता को नहीं देखती है। और उनकी सुख-सुविधाओं को न देकर अन्य सुविधा से भी वंचित कर देते हैं। तो राज्य की स्थिति कैसे सुधर पाएगी।

आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चे के पढ़ने के अतिरिक्त उन्हें पोषण का आवंटन कर पोषाहार वितरण करना घूम घूम कर सर्वे करना बच्चों को कीड़ा का दवा बांटना महिलाओं को अन्य समस्याओं के समाधान करना विभिन्न समस्याओं को लेकर आंगनवाडी सेविकाओं भी अपने आप को सहज महसूस नहीं कर रहे और उन्हें भी तरह-तरह की समस्याओं का समाधान के लिए अधिकारियों के पास जाना पड़ता है लेकिन अधिकारी सुनने को तैयार नहीं पदाधिकारियों ने अपने तरफ से जवाब देते हैं मुझे ऊपर से प्रेशर है इसलिए आप लोग भी अपने सभी कार्य को करते रहे हैं अपने कर्तव्य पर बने रहे ऐसी परिस्थिति में कर्मचारी आर्थिक स्थिति से तंगी होकर अपने परिवार को ठीक ढंग से नहीं देख पाते हैं।

राज्य में आंगनबाड़ी की समस्याओं का समाधान करने के लिए हर सेंटर को मजबूती प्रदान करने के लिए भवन का निर्माण एवं बच्चों के बैठने के लिए उपस्कर की सुविधा करते हुए उन्हें खेलकूद सामग्री के साथ भी सामान की उपलब्धता जरूरी है। ताकि बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जा सके एवं उनके परिवार के परिवेश के मुताबिक बच्चों की आगे की दृश्य दिखाया जा सके। फिर भी ऐसी परिस्थितियों को सरकार द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को सेविका एवं सहायिका के माध्यम से अच्छे तरीके से चलाया जा सकता है।

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