बिहार में 94000 शिक्षकों की बहाली शुरू सभी जिलों में अभ्यार्थी अपने अपने सेंटरों पर काउंसलिंग के लिए तैयार।

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बिहार में 94000 नियोजित शिक्षकों की बहाली को लेकर पूरे जिले में खलबली मची हुई है। जहां शिक्षकों की बहाली को लेकर हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार विकलांग शिक्षक अभ्यर्थियों की जीत हुई। और अंततोगत्वा सरकार को यह आदेश जारी करना पड़ा। कि दिव्यांग शिक्षक अभ्यर्थियों की आवेदन लेने के पश्चात ही मेधा सूची तैयार की जाएगी। और ठीक उसी प्रकार सरकार ने विभाग को आदेश दिया कि आपको जल्द से जल्द विकलांग शिक्षक अभ्यर्थियों से आवेदन लेकर मेधा सूची तैयार करना है। राज्य के तकरीबन 38 जिलों में यह कार्य शुरू हुआ महीनों समय लग गए। तत्पश्चात शिक्षक की बहाली शुरू हुई। शिक्षक की बहाली में अनेकों प्रकार के धांधली सामने आ रही है। कहीं मेधा सूची में गड़बड़ी तो कहीं अंक में गड़बड़ी तो कहीं प्रतिशत में गड़बड़ी करीब-करीब देखा जा रहा है। कि 38 जिलों में अनेकों प्रखंड से यह खबर आ रही है की नियोजन इकाई एवं वहां तैनात हैं। अधिकारी के द्वारा मिली जुली भगत में अपने आदमियों को भर्ती में शामिल कराया जा रहा है।

जहां अधिक अंक वाले को छोड़कर कम अंक वाले को काउंसलिंग करा दिया जा रहा है। सरकार इस पर संज्ञान ले रही है। विभाग मानने को तैयार नहीं लेकिन फिर भी अभ्यार्थी अपना आपत्ति दर्ज करते हुए। अपने विभिन्न समस्याओं को लेकर सरकार एवं विभाग के समक्ष अपनी दृश्य डाल रहा है। ऐसे अब तरह देखा जा रहा है कि हर नियोजन इकाई के पास जहां काउंसलिंग कराना है। एक सौ का वहां 70 ही पहुंच पा रहा है 30 से 40 रिक्त पद रह जा रहे हैं। कारण जो भी हो विभाग की लापरवाही से अन्य समस्याओं का सामना शिक्षक अभ्यर्थियों को करना पड़ रहा है। फिर भी विभाग उस पर बार-बार पर्दा डाल रही है। राज्य के मुखिया नीतीश कुमार के मंत्री विजय कुमार चौधरी शिक्षा मंत्री तरह तरह के बयान देते जा रहे हैं। परंतु इस बयान से शिक्षक अभ्यर्थियों को कितना लाभ प्राप्त होगा यह देखने योग्य है। फिर भी उन समस्याओं को लेकर सरकार अपनी जनता दरबार लगा रही है। और सरकार के जनता दरबार में भी अभ्यार्थी पहुंचकर अपना दुखड़ा सुना रहे हैं। सरकार का कहना है कि जहां भी गलती होगी कार्रवाई होगी।

किसी को बख्शा नहीं जाएगा परंतु यह भाषा तो नीतीश कुमार जी का 15 वर्षों से चलता आ रहा है। कहीं कुछ नहीं बिगरा है और नहीं आज तक कुछ सही हो पाया है। शिक्षक के समस्या आज से नहीं बरसों से चलता आ रहा है। परंतु शिक्षकों की समस्या 15 वर्षो के अंदर भी नितीश कुमार जी से संभव नहीं हो सका। इस बीच पूर्व विधानसभा अध्यक्ष आज के वर्तमान में शिक्षा मंत्री आसन पर विराजमान है। उनसे कुछ अपेक्षाएं की जा रही है कि वे शिक्षकों के समस्याओं को देखें सुने समझे और समस्या का हल निकाल सके। लेकिन मंत्री जी से भी उम्मीद जताई जा रही है क्योंकि वह पिछले 5 वर्षों तक बिहार विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं। तो उन्हें अधिक अनुभव है सारे मंत्री गणों से सुझाव का निदान इन्होंने निकाला करता था। इसलिए शिक्षकों से इन पर पूर्ण विश्वास है कि वह शिक्षकों के लिए कुछ कुछ कर सके। अगर ऐसा कर पाते हैं तो बिहार के शिक्षकों के लिए वरदान साबित हो सकता है। परंतु सरकार तो नीतीश कुमार जी का ही है अगर समस्या का समाधान हो जाता है तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

और शिक्षक अपने आर्थिक स्थिति से उबर सकेंगे। क्योंकि शिक्षक का काम है विद्यालय जाकर बच्चों को पढ़ाना परंतु सरकार बार-बार शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्यों में लगा कर उन्हें अपने कर्तव्य और निष्ठा से वितरित कर देते हैं। आज साढे 400000 बिहार में नियोजित शिक्षक है और 94000 शिक्षकों की बहाली शुरू है। जिसमें करीब करिए 70% उम्मीद है कि शिक्षक की बहाली तो हो जाएगी। चुके हर नियोजन सेंटर से यह पता चल रहा है कि 30 से 40 पद रिक्त रहा जा रहा है। तो 94000 बहाली में अनुमान लगाया जा सकता है कि 70000 इस बार की बहाली में सरकार बहाल कर पाएगी। शिक्षकों की तो कुछ शिक्षकों की समस्याओं का समाधान तो होगा। परंतु सरकार शिक्षकों से केवल पठन-पाठन का कार्य कराए। तभी संभव है तभी राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। अन्यथा इन्हें भी किसी ने किसी विभाग के कार्यों में लगाया जा सके तो पठन-पाठन कार्य बारिश हो सकता है। काउंसलिंग के दौरान देखा गया है कि किसी शिक्षक ने अभ्यार्थी शिक्षक ने एक ही नाम से 5जगह आवेदन डाल दिए हैं।

ऐसा अक्सर हां ईडब्ल्यूएस अभ्यार्थी शिक्षक में देखा गया है। कि कहीं ईडब्ल्यूएस में डाल दिया है तो कहीं जनरल में डाल दिया है। तो कहीं किसी तरह से डाल दिया गया है इन समस्याओं को लेकर और भी काफी मुश्किलें बढ़ गई है। और यही कारण है कि शिक्षक नियोजन में सीट रिक्त रह जा रहे हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए विभाग को कोई रास्ता निकालना होगा। जिससे इन समस्याओं से निजात पा सकते हो हालांकि शिक्षक अभ्यर्थियों को फॉर्म अप्लाई करने में बहुत सारे समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कहीं रिक्त का पता नहीं चलता तो कहीं जमा नहीं लेता शिक्षक अभ्यर्थी दर-दर भटकते हुए अपना नौकरी पाने के लिए हर संभव प्रयास किया। और सरकार को भी इन्हें देखते हुए योग्य अभ्यर्थी शिक्षकों को नौकरी देने का काम करें। ताकि विद्यालय में जाकर बच्चों को कुछ योग्य बना सके। राज्य में 94000 नियोजित शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है। इसी बीच विभाग के आला अधिकारियों का दूसरे विभाग में तबादला करने का भी प्रस्ताव जारी हो गया। ऐसा अक्सर देखा जा रहा है कि विभाग की कार्य को शिथिल होने लगती है। ऐसे परिस्थितियों में विभाग के अधिकारियों को अन्य विभागों में तबादले की प्रक्रिया जारी कर दी जाती है।

जिससे विभाग की कार्य कुशलता अच्छे तरीके से संचालित हो सके। किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न ना हो इस दिशा में पहल की जाती है। परंतु राज्य में 94000 नियोजित शिक्षकों की बहाली करनी है। इस बहाली प्रक्रिया को लेकर शिक्षक अभ्यार्थियों ने अपनी सभी शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कागजात को लेकर सेंटरों पर पहुंचकर अपना उपस्थिति दर्ज करते हैं। सभी ने सरकार के निर्देशानुसार शिक्षक अभ्यार्थियों ने अपने सभी प्रकार के जाति आवासीय आय एवं अन्य प्रमाण पत्रों के साथ काउंसलिंग सेंटर पर पहुंचे। शिक्षा विभाग के द्वारा दिए गए। निर्देशों का पालन करते हुए सेंट्रो पर पहुंचकर अपना काउंसलिंग के लिए मौजूद हैं।

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