बिहार में हो रहे शिक्षक बहाली की को लेकर उहापोह की स्थिति।

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बिहार में शिक्षक अभ्यर्थी बहाली को लेकर तत्कालीन सरकार जनता दल यूनाइटेड मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नई नियमावली सेवा शर्त तैयार किया गया जो कि शिक्षकों के हितार्थ के समरूप नहीं बन सका। इस पर शिक्षक संघों ने काफी रुष्ट नजर आए परंतु सरकार पर किसी प्रकार का असर नहीं दिखाई दिया। बिहार के शिक्षक संघों ने अत्यंत प्रयास करने के बावजूद भी अपने मांगों में असफल पाए गए। परंतु सरकार अपनी हठधर्मिता और मनमाने का रूप दिखाते हुए शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को कुछ काफी सकारात्मक नजरिया नहीं दिखाई गई।

इतना ही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक सभा के दौरान में स्पष्ट रूप से कहा कि बिहार के सारे चार लाख नियोजित शिक्षकों को जो कुछ दिए हैं। वह हम ही दिए हैं और आगे भी हम ही देंगे जो देंगे वही लेना पड़ेगा। इन शब्दों से ऐसा लगा कि सरकार पूर्ण रूप से निरंकुश और अराजक की स्थिति में सरकार बनी का प्रयोग कर रही हैं। परंतु शिक्षक हड़ताल में तो गए लेकिन हड़ताल में जाने के 10 ही दिन बाद कोरोनावायरस नामक संक्रमण शिक्षकों की हड़ताल को खा गया। और ऐसा स्थिति बन गया इस शिक्षक को हड़ताल छोड़ने में या पकड़ने में उहापोह की स्थिति बन गई। इसी दौरान सरकार द्वारा विभागीय आदेश पारित किया गया कि जो शिक्षक बच्चों के मूल्यांकन में भाग नहीं लेंगे वैसे शिक्षकों पर कड़ा कार्रवाई की जाए।

यहां तक कि आदेश निकाल दिया गया कि उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दी जाए। इस निरंकुश सरकार ने अक्सर ऐसा ही आदेश पारित करते रहा है और बार-बार विरोधाभास शब्दों का प्रयोग करते हुए शिक्षकों को अपने मूल स्थिति तक जाने नहीं दिया जाता था। और शिक्षकों की मांग थी समान काम के लिए समान वेतन ग्रुप बीमा अति जिस तरह पहले पहले के शिक्षकों को जो सुविधा प्रदान की जाती है। सरकार के द्वारा वही सुविधा के लिए शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का संकल्प लिया। लेकिन सरकार तो हिल गई परंतु करो ना वायरस संक्रमण आकर शिक्षकों की हड़ताल को हिला दिया। कतिपय कारणों से शिक्षकों ने अपनी हड़ताल को तोड़ते हुए अपने विद्यालयों में कार्य करना शुरू किया। परंतु सरकार ने पुराना दिए हुए आदेश को आगे बढ़ाते हुए कहा 15 से 20% वेतन में बढ़ोतरी के लिए बिहार के साढे चार लाख नियोजित शिक्षकों को अप्रैल 2021 से लागू कर देंगे।

लेकिन आज एक ऐसा हालत बन चुका है वेतन में बढ़ोतरी क्या महंगाई भत्ता भी तीन किस्तों का रूप चुका है। केंद्र सरकार देने से तो रही राज्य सरकार भी हाथ उठा दिया और उन्होंने कतिपय कारण दिखाते हुए कहा कि कोरोनावायरस को लेकर राज्य एवं देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। जिससे कि कर्मचारियों को महंगाई भत्ता 2019 से ही फ्रीज कर दिया गया। आज कर्मचारियों को 32% की जगह मात्र 17% ही महंगाई भत्ता दे हो रहा है। ऐसा स्थिति बन गया है कि कर्मचारी वह भूख के कगार पर आ गए हैं, लेकिन सरकार अपनी हठधर्मिता को देखते हुए कर्मचारियों की परेशानियों का कोई मोह माया नहीं है। इधर शिक्षक बहाली को लेकर चल रहे। सभी नियोजन इकाइयों पर आरोप लगते जा रहे हैं कि इन्होंने मेधा सूची में धांधली किया है।

कहीं-कहीं ऐसा देखा गया है कि नियोजन इकाई पिट भी गए हैं ऐसे तरह देखा जाता है कि जब मेधा सूची के अनुसार बहाली हो रही है और वहां भीड़ जुटी हुई है। किसी कारणवश किसी शिक्षक का एक पेपर का प्रमाण पत्र छूट जाता है और वह समय लेता है जिस कारण से कार्यों में बाधित होती है। ऐसे ही स्थितियों में मेधा सूची के नीचे अंक वाले अभ्यर्थी हंगामा शुरू कर देते हैं। इससे नियोजन इकाई परेशानी में पड़ जाते हैं लेकिन बिहार सरकार के सेफ्टी के नाम पर बिल्कुल नहीं व्यवस्था की जाती है। जिससे कि नियोजन में बढ़ रहे आरोप-प्रत्यारोप का निराकरण किया जा सके। ऐसा अक्सर देखा जाता है कि जब बहाली होती है और इस तरह से मेधा सूची का भीड़-भाड़ शुरू हो जाता है तो समानता के साथ साथ विषमता भी प्रस्तुत होने लगता है। बहुत सारे ऐसे नियोजन सेंटर पर देखा गया है कि माइक के व्यवस्था की गड़बड़ी के कारण और हंगामा तो हुआ ही हैं। व्यापक रूप से अंको में भी हेराफेरी किया है। अक्सर देखा गया है कि नियोजन के एक दिन बाद समाचार पत्रों में बड़े अक्षरों में लिखा हुआ पाया गया है कि कम अंक वाले शिक्षक बन गए अधिक अंक वाले द्वारा लौट गए।

इसका मुख्य कारण यह है कि नियोजन इकाई एवं वहां कार्यरत सरकारी कर्मचारियों ने मेधा सूची में हेराफेरी करने का कार्य किया है। ऐसा अगर नहीं किया होता तो कल के अखबारों में मोटे अक्षरों में यह नहीं लिखा रहता। अधिक अंक वाले घर चले गए कम अंक वाले सरकारी शिक्षक बन गए, लेकिन फिर भी ऐसा मान्यता है, कि शिक्षक बहाली में सरकार तो पूर्ण निश्चिंत है और अपने विभाग के अपर मुख्य सचिव को यह निर्देश प्रदान यह निर्देश प्रदान कर दिया है। जी किसी तरह की गड़बड़ी आने पर कड़ाई से पालन किया जाए और उचित कार्रवाई की जाए। कुछ सेंटरों पर देखा गया है यह फर्जी शिक्षक रहने पर उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है परंतु फर्जी शिक्षक कहां मानते हैं यहां नहीं तो वहां वहां नहीं तो कहा जहां नहीं मिले वहां जहां मौका मिलता है। अपना भाग्य आजमा ही लेते हैं और उन्होंने एक सेंटर नहीं दूसरे सेंटर नहीं तीसरे सेंटर नहीं चौथे पर अजमाही लेते हैं। परंतु सरकार ने इस बार सख्त कार्रवाई करते हुए कहा है कि शिक्षकों की सर्टिफिकेट जांच करने के बाद ही नियुक्ति पत्र प्रदान की जाएगी। तो इस बार सरकार के साथ-साथ विभाग भी सख्त है और ऐसा देखा जा रहा है कि इस बार शिक्षकों में फर्जीवाड़ा न के बराबर आए। जिससे कि शिक्षकों अथवा विभागों की बदनामी नहीं हो सके।

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