बिहार में शिक्षक अभ्यार्थियों की कठिन परिश्रम के बाद कैसे शिक्षक बनते हैं?

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आज बिहार में बरसों से संघर्ष कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों का शिक्षक नियुक्ति काउंसलिंग शुरू है, परंतु नियुक्ति में अनेकों प्रकार की विसंगतियां दिखाई दे रही है।सरकार द्वारा नियमावली आदेश के मुताबिक राज्य में 94 हजार नियोजित शिक्षकों की बहाली होनी है इसी इसी प्रक्रिया के तहत राज्य के 38 जिलों के तमाम प्रखंडों में शिक्षक नियुक्ति की बहाली प्रक्रिया चलाई जा रही है। शिक्षक अभ्यार्थियों ने अपने अपने शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण अंक प्रमाण पत्रों की जमा करने के उपरांत पावती रसीद को लेकर अपने-अपने सेंटरों पर सर समय उपस्थित होकर काउंसलिंग में भाग ले रहे हैं। अक्सर देखा जा रहा है कि किसी किसी सेंटरों पर अंक प्रमाण पत्र को लेकर हेरा फेरी नजर आ रही है, फिर भी शिक्षक अभ्यार्थियों ने शांति पूर्वक शिक्षा विभाग की नियमों का पालन करते हुए अपने तमाम कागजात को लेकर काउंसलिंग सेंटर पर उपस्थित होकर अपना काउंसलिंग करा रहे हैं।

चुकी बरसों से टी ई टी, एसटीइटी, सीटीईटी पास करने के उपरांत शिक्षक अभ्यार्थियों ने महीनों से नौकरी की तलाश में टकटकी लगाए बैठे उनके इंतजार की घड़ी अब समाप्त होने वाली है, और वह नौकरी प्राप्त करने के बाद अपने विद्यालयों में उपस्थित होकर सेवा प्रदान करना चाहते हैं। क्योंकि शिक्षक एक राष्ट्र निर्माता कहलाते हैं और अपने कर्तव्य का पालन करते हुए कार्य करना चाह रहे हैं। शिक्षक नियुक्ति नहीं होने के कारण शिक्षक अभ्यार्थियों ने लगातार सरकार के समक्ष आग्रह करते हुए अपनी मांगों को लेकर बार-बार दोहराते रहे अंतोगत्वा सरकार ने शिक्षक अभ्यर्थियों को टीईटी, एसटीईटी, सीटीईटी 7 वर्ष की मान्यता को सरकार ने आजीवन मान्यता प्रदान कर दिया। अब शिक्षक अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ चुकी है। अब उन्हें बार-बार प्रत्येक वर्ष परीक्षा देने की नौबत नहीं आएगी और दुबारा इस प्रमाण पत्र के आधार पर अगर सरकारी नौकरी नहीं होती है तू भी प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने योग्य माने जाएंगे, और उन्हें किसी प्रकार की विद्यालयों में शिक्षण के दौरान परेशानी नहीं होगी चुकी, प्राइवेट या सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण डी एल एड, ओडीएल या B.Ed कर टी ई टी, एस टी ई टी, सीटीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।

पास करने के उपरांत ही आप बच्चों को निजी या सरकारी विद्यालय में पढ़ाने योग्य माने जाएंगे। शिक्षक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को कौशल विकास बच्चों में विकसित करने के लिए तरह तरह के प्रशिक्षण दिए जाते हैं। उसी प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को सीख लाया जाता है कि विद्यालय में शिक्षक बनने के बाद किस तरह से बच्चों को शिक्षण अधिगम का प्रयोग करते हुए बच्चों में समझ का विकसित करेंगे। वैसे परिस्थितियों में प्रशिक्षण करने का नजर आता है। जिस समय अनेकों प्रकार के समस्या सामने आ जाते हैं तो ऐसी स्थिति में प्रशिक्षण के दौरान ट्रेनिंग से प्रशिक्षण लेने के प्रतिफल प्राप्त होता है। वैसे शिक्षक तो प्रशिक्षण पूर्ण करते करते वह इस तरह का योग पुरुष बन जाते हैं कि बच्चों में समझ विकसित करने की कूट-कूट कर भरी जाती है और वह अपने वर्ग में बच्चों को सुगमता पूर्वक पढ़ाते पढ़ाते इसी आधार पर सुनना बोलना पढ़ना लिखना इस प्रकार से बच्चों में शिक्षण का कार्य कर बच्चों को योग्य प्रदान कर देते हैं। शिक्षक अपने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न प्रकार के कठिनाइयों का सामना करते हुए शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र पर समूह में कार्य करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

इस प्रशिक्षण से यह लाभ मिलता है कि जब अपने विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या कम होती है, तो किस प्रकार विद्यालयों में बच्चों को समूहों में शिक्षण कार्य किया जा सकता है। ताकि अधिक बच्चे रहने पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है, कारण ऐसा होता है कि जब विद्यालय संचालित होती रहती है उसी क्रम में कभी सीआरसी की बैठक तो कभी बीआरसी की बैठक होती है ऐसे परिस्थितियों में शिक्षकों की संख्या अचानक घट जाती है और विद्यालयों में बच्चों की संख्या बरकरार रहती है। तो ऐसे परिस्थितियों में यह प्रशिक्षण कारगर साबित होता है प्रशिक्षण के दौरान इस तरह की कई गतिविधियां बताई जाती है। जिससे शिक्षण कार्य में सहयोग प्रदान करती है। सरकार शिक्षा विभाग के द्वारा शिक्षकों को समय समय पर विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण प्रदान करती है। जिससे शिक्षकों में दोबारा ऊर्जा का संचालन हो जाती है जिससे शिक्षक अपने वर्ग कक्ष में बच्चों के बीच शिक्षण अधिगम को और बेहतर ढंग से तैयार कर बच्चों के बीच परोसते हैं जिससे बच्चे अधिक से अधिक लाभ प्रदान करते हैं।

सरकार द्वारा विभाग पर विभिन्न तरह की योजनाएं चलाई जाती है। पोशाक योजना, साइकिल योजना, मध्यान भोजन योजना जिससे बच्चों की विद्यालयों में ठहराव हो सके और बच्चे अधिक से अधिक विद्यालय पहुंच सके। शत-प्रतिशत नामांकन हो सके, जिसे हमारे समाज की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके। शिक्षकों को नौकरी के दौरान विभिन्न प्रकार के वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। ताकि उन्हें अपने कार्य शिक्षण कार्यों में करने में किसी प्रकार की मानसिक या शारीरिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ सके। सरकार द्वारा यह भी सुविधा प्रदान की जाती है, कि जब शिक्षक सेवानिवृत्त होते हैं तो उन्हें कुछ मोटी राशि भी दी जाती है, जिसे बच्चे हुए जीवन को स्वेच्छा से निर्वहन कर सके। शिक्षकों को कक्षा संचालन अथवा विद्यालय संचालन के दौरान असामाजिक तत्वों का भी सामना करना पड़ता है। और उन्हें भी अपने हिसाब से समझा-बुझाकर विद्यालय प्रांगण में व्यवस्थित ढंग से समझाते हुए विद्यालय कार्य को अग्रसर कराने की भी क्षमता रखनी पड़ती है। जिससे किसी प्रकार की अपने या बच्चों के ऊपर नहीं पढ़े इस पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह सभी प्रकार की प्रशिक्षण शिक्षकों को प्रदान की जाती है, और वह बखूबी उन्हें निर्वाहन कर अपने कार्यों को पूर्ण करते हैं।

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