बिहार के सारे चार लाख नियोजित शिक्षकों के योगदान किए हो गए 15 वर्ष फिर भी शिक्षकों को सेवा देने में हो रही कठिनाई।

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कारण की वर्ष में 4 बार 5 बार शिक्षकों के सर्टिफिकेट शैक्षणिक प्रशासनिक जांच बार-बार की जा रही है। फिर भी अब तक जांच पूर्ण नहीं हो सकी। शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही की वजह से शिक्षक दर-दर भटक रहे हैं उनकी फोल्डर शिक्षा विभाग के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पास जमा कर दिया गया। परंतु विभागीय लापरवाही की वजह से आज तक शिक्षकों के फोल्डर नहीं जमा हो सके हैं। आज प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने पत्र जारी कर अंतरिम आदेश के रूप में 20 जुलाई 2021 तक अपना फोल्डर पोर्टल पर डाउनलोड नहीं करते हैं। तो वैसे शिक्षकों को सेवा से हटा दी जाएगी। पोर्टल पर सर्टिफिकेट डाउनलोड नहीं करने वाले शिक्षकों को समझा जाएगा

वह अवैध हैं और उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं विभाग ने यह भी आदेश किया है कि नौकरी से हटाने के उपरांत उन्हें दी गई राशि भी वापसी करवाई जाएगी। वर्ष 2006 से लेकर 2015 के बीच जो शिक्षक बहाल किए गए हैं उन शिक्षकों से सर्टिफिकेट प्रमाण पत्र शैक्षणिक व शैक्षणिक टीईटी सभी प्रकार के प्रमाण पत्र फोल्डर के साथ जमा करने का आदेश दिया गया था। जो कि आज तक लगभग 66000 शिक्षकों का फोल्डर जमा नहीं हो पाया है। परंतु शिक्षक अपने प्रयास पूरी कर रहे हैं ऐसा अक्सर दिखा जा रहा है कि अगर आपके पास मैट्रिक इंटर सभी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र है। लेकिन अगर मैट्रिक के परीक्षा का एडमिट कार्ड आपके पास नहीं है तो फोल्डर अपलोड नहीं होगा। यथा यह समझे कि एक भी अगर डॉक्यूमेंट आपके पास उपलब्ध नहीं है तो वह अपलोड नहीं होगा।

जिससे कि आपको अवैध इनवैलिड माना जाएगा। यह दुर्दशा बिहार के चार लाख नियोजित शिक्षकों की स्थिति बन गई हुई है। बद से बदतर क्योंकि वर्ष में दो बार तीन बार बार मांगा गया फोल्डर अब तक निगरानी जांच जब शुरू करने आए तो शिक्षक को ही फोल्डर जमा करना यह कहां का न्याय पूर्ण है। जब आपने सभी प्रकार की शैक्षणिक प्रशासनिक नेता से संबंधित प्रमाण पत्र प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास एक एक कॉपी जमा तीन तीन कॉपी जमा हो गया। तो फिर आज के दिन में क्यों नहीं हो रहा है। यह विचार करने की बात है और इस पर विभाग के साथ-साथ शिक्षक संघों को भी निर्णय लेने की आवश्यकता है। क्योंकि ऐसा नहीं करने पर शिक्षक मानसिक एवं शारीरिक रूप से परेशान हो रहे हैं।

जिससे शिक्षकों को शिक्षण कार्य में मन नहीं लगेगा और वह अंदर ही अंदर चिंतित एवं डर बना रहेगा। तो बच्चों को किस प्रकार से शिक्षा का आशा बन सकता है। ऐसे परिस्थितियों में सरकार एवं शिक्षक संघों को स्टैंड लेना चाहिए। आज के दौर में आपने देखा होगा कि शिक्षक कम वेतन होते हुए भी शिक्षकों को परिवारिक कलह टेंशन का सामना करना पड़ता है। और इसी बीच सरकार द्वारा आदेश श्रवण के लेकर अंचल अधिकारी के पत्र के माध्यम से शिक्षकों को हर जगह कुछ दिन पहले शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण अर्थात निष्ठा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कुछ शिक्षक समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत सर्टिफिकेट डाउनलोड कर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पास जमा किए। तो कुछ शिक्षक विलंब होने की वजह से जब जमा करने गए तो उनकी सर्टिफिकेट नहीं ली गई।

और उन्हें राशि देने से मना कर दिया गया। बताया जाए कि इस परिस्थिति में शिक्षक इससे अच्छा अपने परिवार के बच्चों को नहीं देखे तो फिर उनके कमाने का औचित्य क्या रह जाता है। ऐसा अक्सर देखा जाता है कि शिक्षक अपने कर्तव्य पर बनने के लिए यथासंभव प्रयास करते हैं। परंतु विभाग कुछ न कुछ नया आदेश जारी कर देता है जिसे शिक्षक परेशान हो जाते हैं। आज दीक्षा प्रशिक्षण लेने के उपरांत कुछ शिक्षकों का विलंब होने से उनके प्रमाण पत्र नहीं लिए गए। और उन्हें प्रशिक्षण का राशि प्राप्त नहीं हो सका कोई तो इस परिस्थिति में और शिक्षक करे तो क्या करें हाल ही में प्राथमिक शिक्षा निदेशक एवं अपर मुख्य सचिव राहुल कुमार सिंह तथा गिरवर दयाल सिंह शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी रंजीत कुमार सिंह द्वारा मिशन कैवल्या कार्यक्रम यूट्यूब पर चलाई गई।

वह भी लाइव यूट्यूब लाइव देख कर भी शिक्षकों का अंदाजा लगा सकते हैं। कि किस तरह हुआ अपने कर्तव्यों पर करते विदेश रंजीत कुमार सिंह का वीडियो करीब-करीब सभी लोगों को पसंद आया है होगा। और विभागीय किसी प्रकार की न्यूज़ होती है। तो मैं आप लोगों से शेयर करता हूं जिस प्रकार आज शिक्षकों की बहाली हुई। तो हमने नहीं करवाया था। कि उधर बहुत सारे तरह के अन्य समस्याओं से घिरे हुए हैं वैसे परिस्थितियों में किसी अभिभावक या समुदाय के घर या दरवाजे पर इस तरह का कार्यक्रम चलाया गया साथ ही मिशन का वर्ल्ड को लेकर जो कार्यक्रम चलाई जा रही है। वह आज भी चलाई जा रही है। और रंजीत कुमार सिंह प्राथमिक शिक्षा निदेशक के द्वारा ज्यादा से ज्यादा समझाने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना हम शिक्षकों को नहीं करना पड़ेगा।

इतनी ही नहीं आज आपदा की घड़ी में पूर्णा काल की अवधि में समस्था रूपों को प्रदर्शित करते हुए अपने कर्तव्य पर बना रहना चाहते हैं। और जिस तरह से सरकार द्वारा यह नीति चलाई जा रही है। उससे सरकार एवं विभाग को दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा। कोई से सुधारात्मक उपचारात्मक विचारों को व्यक्त करते हुए सवाल किया जा सकता है। नियोजित शिक्षकों ने लगभग 15 से 17 वर्ष तक शिक्षा विभाग में अपनी सेवा पूर्ण कर ली परंतु आज भी विभाग में सेवा देने में असहज महसूस कर रहे हैं। कारण यह है।

कि सरकार अपनी हठधर्मिता छोड़ने को तैयार नहीं शिक्षकों को शिक्षण कार्य से अलग हटकर अन्य कार्यों में बार-बार लगाती रहती है। शिक्षक संघों ने इसका घोर विरोध करते रहे हैं सरकार बार-बार कहती है। अब शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में नहीं लगाया जाएगा परंतु सरकार कह कर भी पत्र विभाग के अधिकारियों के द्वारा जारी करा दिया जाता है। जिससे शिक्षक अपने नौकरियों को बचाने के लिए शिक्षक अन्य कार्यों में योगदान दे देते हैं। परंतु हर स्थिति में शिक्षक को दोषी ठहरा कर उनके कार्य कुशलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया जाता है। और उन्हें अन्य भक्तों के साथ साथ वेतन बढ़ोतरी का भी समय से लाभ नहीं दिया जाता है। जिससे शिक्षकों में आक्रोश की स्थिति बनी रहती है।

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