बिहार के राज्य कर्मियों को केंद्रीय कर्मियों के अनुसार ही बढ़ेगा वेतन।

0
118

बिहार सरकार से भी राज्य कर्मियों ने गुहार लगाने लगा है, कि जिस प्रकार केंद्रीय कर्मचारियों को केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता एवं वेतन वृद्धि को लेकर जो फैसला लिया गया है। उसी प्रकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी लोगों ने गुहार लगाना शुरू कर दिया है। ताकि बिहार के कर्मचारियों को भी बढ़ा हुआ वेतन एवं महंगाई भत्ता का लाभ ससमय मिल सके। केंद्रीय कर्मचारियों के अनुसार राज्य कर्मियों को भी जुलाई महीने में 3% महंगाई भत्ता का लाभ प्राप्त हो रहा है। ठीक उसी प्रकार बिहार के साढे चार लाख नियोजित शिक्षकों को भी इसका लाभ मिल सके। ताकि आगे चलकर इनके भी वेतन बढ़ोतरी एवं आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। ऐसा करने के उपरांत ही अपने विद्यालयों में पठन-पाठन कार्य में तन्मयता से मन लगाकर कार्य पूरी की जा सकती है।

और जहां सभी कर्मचारियों के वेतन का वृद्धि हो वहां बिहार के साडे चार लाख नियोजित शिक्षकों के वेतन वृद्धि नो हो। तो इससे बड़ा उदासीनता का उदाहरण क्या हो सकता है। जिस समय नियोजित शिक्षकों ने हड़ताल पर गया था। उस समय राज्य सरकार ने यह वादा किया था, कि हमने सुप्रीम कोर्ट के कहने के अनुसार बिहार के साढे चार लाख नियोजित शिक्षकों को 15% की एकमुश्त वेतन वृद्धि करेंगे। तो उस पर भी ध्यान आकृष्ट कराते हुए बिहार के नियोजित शिक्षकों के संघों ने अपने अपने माध्यम से सरकार को अवगत कराने की कोशिश कर रही है। ताकि सरकार समय से शिक्षकों की वेतन वृद्धि कर सके। तथा ऐसा पराया देखा गया है कि केंद्र सरकार के बढ़ोतरी के बाद राज्य सरकार ने हमेशा पीछे रह जाती है। और कुछ ना कुछ बहाना बहाना बनाती है जैसे अभी आर्थिक स्थिति राज्य की ठीक नहीं है। वित्तीय बोझ सहने के लिए राज्य में किसी प्रकार की आय का स्रोत नहीं बन पा रहा है।

इन्हीं सब कारणों को दिखाकर राज्य कर्मियों को वेतन वृद्धि एवं महंगाई भत्ता से वंचित कर दिया जाता है। ऐसा बार बार देखने को मिला है। जैसे पिछले सेवंथ पे कमिशन जब केंद्र सरकार ने लागू कर दिया था। तो लगभग 2 वर्षों तक राज्य सरकार ने यही राग अलापति रही। कि बिहार की स्थिति अभी वेतन बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। राज्य की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है तो ऐसे परिस्थितियों में राज कर्मियों को अपनी मांग बार-बार सरकार के समक्ष प्रस्तुत करती रही। परंतु राज्य सरकार इस बात को कतई मारने का तैयार नहीं था। परंतु हर स्थिति में 2 वर्षों तक राज्य कर्मियों को वेतन बढ़ोतरी को लेकर इंतजार करना पड़ा। बहुत इंतजार के बाद हड़ताल अथवा धरना प्रदर्शन करने के बाद राज्य सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुबू आहट दी। तत्पश्चात लगभग 2 वर्षों के बाद कर्मचारियों को सेवंथ पे कमीशन का लाभ मिलना शुरू हुआ।

अंतर्गत वा यह देखा गया कि जब सभी कर्मचारियों के मिल जाने के पश्चात बिहार के साढे चार लाख नियोजित शिक्षकों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से वेतन वृद्धि करवाने के लिए कम मशक्कत नहीं करनी पड़ी। जब सरकार देने के लिए तैयार हुई तो विभागीय आदेश में कुछ महीनो डालता गया जब शिक्षकों ने अपना धरना प्रदर्शन जारी रखा। तब विभाग के अधिकारियों ने सुन्नी और वेतन वृद्धि का लाभ देना शुरू किया। बकाया वेतन अंतर वेतन एरिया वेतन इतना लंबा खींचता गया कि शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो गई। फिर भी शिक्षक हार मानने को तैयार नहीं अपने कार्यों पर कर्तव्य के अनुसार अपने कार्यों पर डटे रहे। और विभिन्न समस्याओं का समाधान करते हुए अपने सभी परिस्थितियों को देखते हुए परिवार के भरण-पोषण को देखते हुए धरना प्रदर्शन करते रहे। सरकार से वेतन वृद्धि का लाभ प्राप्त किया। आज सरकार के वादाखिलाफी धरना प्रदर्शन शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट का दिया हुआ वादा राज सरकार अभी तक नहीं निभा पाए। वेतन वृद्धि में एकमुश्त 15% का लाभ देना था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ आज तक देखा जा रहा है कि शिक्षक आर्थिक स्थिति में आकर तंगी होकर त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहे हैं।

परंतु नियोजित शिक्षकों का न सरकार सुनने वाली है नहीं विभाग सुन रही है। जब शिक्षकों के 4 माह का वेतन बकाया हो जाता है तो 1 माह का वेतन भुगतान कर दिया जाता है। जिससे शिक्षक अपने एवं अपने परिवार का सही से भरण पोषण नहीं कर पाते हो। फिर भी शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए या हमेशा से दृश्य रहती है कि बच्चों के भविष्य खिलवाड़ ना हो सके। और येन केन प्रकार से शिक्षक अपना जीवन व्यतीत करते हुए विद्यालयों का संचालन कक्षा का संचालन नियम पूर्वक 100 समय पर करते रहते। फिर भी सरकार अपनी हठधर्मिता को नहीं छोड़ पाती है। और शिक्षकों के विभिन्न समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट नहीं होती है तो ऐसा पराया देखा जाता है। कि शिक्षक अपने ममता से बच्चों के सर्वांगीण करने में सहयोग करते हैं।

शिक्षकों के वेतन वृद्धि को लेकर संघ एवं विभाग तत्पर है। परंतु सबसे बड़ी तो समस्या या है की राज्य सरकार आर्थिक स्थिति को बंद करते हुए अपनी समस्या बार-बार दोहरा रही है। अगर ऐसी ही परिस्थिति बनी रही तो वेतन वृद्धि कैसे संभव हो सकती है। केंद्र सरकार तो राज्य सरकार को अपने हिस्से का राशि समय से दे देती है। परंतु राज्य सरकार दूसरे मदों में रुपए को खर्च कर शिक्षकों के समस्याओं को खड़ा कर देती है। और कहती है वित्तीय स्थिति अभी मजबूत नहीं होने के कारण शिक्षकों को वेतन वृद्धि नहीं की जा सकती है। केंद्र द्वारा दिए गए राशि से सरकार ने बच्चों के साइकिल योजना पुस्तक योजना में खर्च कर देती हैऔर वेतन को लंबित कर देती है। जिसे समस्या शिक्षक की बढ़ती ही जाती है।

Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here