नियोजित शिक्षकों को जल्द मिलेगी 15% का लाभ।

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नियोजित शिक्षक को हड़ताल में यह सरकार द्वारा निर्देश प्राप्त हो गया था और इसी पर समझौता हुआ था। कि नियोजित शिक्षकों को अप्रैल 2021 से वेतन में एकमुश्त 15% की वृद्धि की जाएगी। परंतु सरकार ने हड़ताल अवधि में नियोजित शिक्षक संघों से वार्ता करने के बाद हड़ताल तो टूट गई परंतु सरकार ने अभी तक इस पर विचार नहीं करते हुए नियोजित शिक्षकों को वेतन वृद्धि के लाभ से वंचित कर नियोजित शिक्षकों को आर्थिक रुप से दोहन किया जा रहा है।

जब नियोजित शिक्षकों को सातवें वेतन भुगतान नहीं होगी तो शिक्षक अपने विद्यालय में अपने कर्तव्य का शत प्रतिशत पालन कैसे कर सकते हैं। शिक्षा विभाग के शिक्षा मंत्री ने बार-बार यह आश्वासन देते रहते हैं। कि शिक्षकों के साथ किसी प्रकार की परेशानी उन समस्याओं को लेकर बार-बार टिप्पणी करते रहते हैं कि शिक्षकों के साथ किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं दी जाएगी। उन्हें समय से वेतन का भुगतान एवं पदोन्नति के लिए भी शिक्षा मंत्री जी ने शिक्षकों के बार-बार आश्वासन देते रहते हैं। लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं हो पाती है बिहार के साडे चार लाख नियोजित शिक्षक विभाग एवं मंत्री के टकटकी लगाए बैठे रहते हैं।

अपने वेतन एवं वेतन संरचना के सुधार में लगे रहते हैं। परंतु विभाग से लेकर मंत्री तक अपने बातों को बदल बदल कर बात को बनाते रहते हैं ऐसी परिस्थिति में शिक्षकों के 15% की वेतन वृद्धि तो दूर जो पुरानी वेतन मिल रही है। वह भी समय से नहीं मिल पाती है जब शिक्षक को समय से वेतन भुगतान नहीं होगी तो उनके परिवार के आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो जाएगी। शिक्षकों की बार-बार धरना प्रदर्शन ज्ञापन सौंपते सौंपते शिक्षक परेशान रहते हैं। परंतु शिक्षक के लिए विभाग या सरकार कुछ भी सकारात्मक पहल नहीं कर पाती है आज देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 21वी सदी की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर बहुत सारे सपने संजोग रहे हैं। लेकिन मंत्री जी शिक्षकों के मान सम्मान एवं आर्थिक स्थितियों पर बिल्कुल नहीं ध्यान देते हैं। जब तक शिक्षकों को संतुष्ट नहीं रखेंगे तब तक राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है।

तरह-तरह की लोक कल्याणकारी योजना का सपना दिखाते रहते हैं। मंत्री जी ने विभिन्न योजनाओं विभिन्न पहलुओं की सराहना तो करते हैं परंतु शिक्षकों द्वारा दी गई। योगदान के बारे में उनके उनके नजर में कोई सराहनीय कार्य नहीं दिखती है। जिससे शिक्षकों को मान सम्मान बढ़ा सकें ऐसा देखा जाता है कि शिक्षा के अधिक समावेशी बनाने को लेकर विद्यार्थियों को 2021 को लेकर तैयार किए हुए राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न कार्य को लेकर शुरुआत की जा रही है। परंतु इस अवसर पर मंत्री बोलते रहते हैं और कहते रहते हैं 1 साल 1 महीने में उपलब्धि को देखकर आत्मविश्वास बढ़ाना यह कहीं से प्रायः नहीं लगती है। उपलब्धियां तो उन्होंने बहुत सारे गिनाते हैं आगे भी दिखाते रहते हैं। और नई-नई मसौदा तैयार करते रहते हैं बच्चों को अब तक अगस्त माह बीत चुकी है। परंतु पुस्तक नहीं प्राप्त हुआ नए प्रावधान के अनुसार अब बच्चों को पुस्तक ना देकर उनकी उचित मूल्य की राशि बच्चे एवं अभिभावक के खाते पर पिछले सत्र से जाती है।

लेकिन इस बार अगस्त में अंतिम चरण हैं परंतु पुस्तक की कोई किताब खरीदने के लिए बच्चे या उनके अभिभावक के खाते में राशि नहीं दी गई है। जो बहुत ही खेद पूर्ण माना जा सकता है। नई नीति लागू करने के बाद उपलब्धियों को लेकर बहुत सारे पुस्तकों का उपलब्धियां विमोचन के साथ किया गया। पढ़ने के साथ ही दक्षता समझ और गुणवत्तापूर्ण प्रवीणता के लिए राष्ट्रीय पहल भारत एसएलएन टूल्स के मुताबिक शुरू हुआ। परंतु उन्होंने कहा कि पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उपलब्धियों का आंकड़ा प्राप्त कर मसौदा प्राप्त होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। और बार-बार शिक्षा मंत्री या विभाग द्वारा यह निर्देशित किया जाता है। कि बच्चे को कक्षा में खेल-खेल में पढ़ाने को लेकर हर समय हर संभव प्रयास किया जाता है।

सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति लागू करने के पश्चात शिक्षकों के पदोन्नति 10 वर्ष 8 वर्ष का जो पहले से नियम लागू है। उस नियम के विरुद्ध पंचायती राज संस्थान एवं नगर निकाय संस्थान में कार्यरत नियोजित शिक्षकों को अनदेखी करते हुए नियमों का पालन नहीं करते हुए अब तक शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित रखा गया आज आप देख सकते हैं किसी नियोजित शिक्षक ने 18 बरस तो किसी ने 17 वर्ष का अपने कार्य संपूर्ण कर लिया। परंतु अभी तक उन लोगों को पदोन्नति के नाम पर बल बुलाया जा रहा है जो यह बहुत ही निंदनीय और और सहयोगात्मक माना जा सकता है। परंतु इस आशय को लेकर शिक्षक अपनी बात को उच्चाधिकारी से लेकर विधायक एवं मंत्रियों तक पत्र के माध्यम से ज्ञापन सौंपते रहते हैं। शिक्षकों को आश्वासन के सिवा और कुछ नहीं प्राप्त हो पाता है।

जिसे देखकर वर्तमान सरकार इन शिक्षकों के बारे में सोचते हुए उनके परिवार की बिगड़ती हुई हालत को देखते हुए उन्हें तत्काल वेतन में 15% की इजाफा कर उन्हें मूल वेतन में जोड़कर वेतन निर्धारण कर नियम संगत के अनुसार वेतन का भुगतान कराने की सोचनी चाहिए। ताकि शिक्षक भी खुश होकर विद्यालयों में अपने कार्यों का निर्वहन कर सकें जब तक शिक्षक भूखा रहेगा तब तक बच्चों को विद्यालय में ज्ञान कैसे प्रदान करेंगे इस पर सरकार एवं विभाग को गहन चिंतन और मनन करनी चाहिए। इसके बाद ही राष्ट्र के निर्माण के बारे में सोचा जा सकता है। अभी कोरोनावायरस महामारी को लेकर शिक्षकों के इंक्रीमेंट भी रोक दी गई है। जिससे शिक्षक आर्थिक स्थिति के दंगे में आ चुके हैं। सरकार एवं विभाग को अविलंब नियोजित शिक्षकों को इंक्रीमेंट के साथ वेतन का भुगतान करनी चाहिए। जिससे उनके परिवार के भरण पोषण सही ढंग से शिक्षक कर सके तब जाकर एक राष्ट्र का निर्माण संभव हो सकता है।

शिक्षक अपने घर से भूखे पेट आकर विद्यालयों में सत प्रतिशत कार्य संपन्न नहीं कर सकते जो बच्चे ग्रामीण विद्यालय परिवेश से हमारे विद्यालय में आते हैं। उन्हें किसी प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़े तो ऐसे परिस्थितियों में उन्हें समझ बूझ कर ही अपने कार्यों को संपादित करना होगा। तथाकथित विभाग द्वारा सरकार के इस रवैया से शिक्षक तो परेशान हैं। अभिभावक भी परेशान हैं क्योंकि सरकार ना समय से शिक्षकों के वेतन देते हैं। और नहीं बच्चों के किताब जब उन्हें किताब ही नहीं मिलेगी तो वह बच्चे के समग्र विकास कैसे हो सब संभव है। आप इस आशय से यह अनुमान तो जरूर ही लगा सकते हैं।

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