जलजमाव से मुक्ति के लिए सरकार ने करो रुपए का लाया नया प्लान।

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बिहार के मुजफ्फरपुर से खबर आ रही है जहां स्मार्ट सिटी को लेकर विभाग एवं सरकार बड़े-बड़े बातें बना रही है। और मुजफ्फरपुर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तरह-तरह के चर्चाएं चल रही है। इसको लेकर सरकार ने जलजमाव से मुक्ति को लेकर 234 करोड़ का नया प्लान जारी कर दिया है। इस प्लान से शहर की साफ सफाई को लेकर राशि को लेकर डीपीआर कार्यालय में भेज दिया गया है। जहां से केंद्र का निर्माण होता है। वैसे परिस्थितियों में जहां स्मार्ट सिटी की बात की जाती है। और केंद्र द्वारा राज्य को राज्य द्वारा शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए योजनाएं तैयार की जाती है। डीपीआर विभाग में जब टेंडर पास होती है और उसकी अनुमति प्राप्त हो जाती है। तब जाकर स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया जाता है। डीपीआरके बैठकों में यह अंतिम निर्णय लिया जाता है हजहां शहरों की विकास एवं व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए लोक प्रभावी रूप से उन्हें मनोनीत करते हैं। लेकिन यह बार-बार देखा जाता है कि सरकार तो रुपए देकर टेंडर का निर्माण कर देती है। परंतु वहां बैठे बड़े नेता छोटे नेता सभी एक दूसरे के खींचातानी में लगे रहते हैं। और पैसों की बंदरबांट हो जाती है।

जिससे धरातल पर सत प्रतिशत कार्य संपादित नहीं होती है जिससे शहरों की दशा बिगड़ जाती है। तू इन परिस्थितियों में सरकार को मजबूती एवं सख्ती से पेश होना चाहिए। जिससे सरकारी आवंटन को टेंडरों के साथ गठजोड़ कर इनकी प्रतिपूर्ति अच्छे तरीकों से किया जा सके। जहां कार्यों में लगे पैसों की महत्ता को समझा जा सके और शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में मदद मिलेगी। जहां मुजफ्फरपुर शहर की बात करें क्योंकि यहां बरसों से जलजमाव की समस्या के साथ अनेक प्रकार की व्यवस्थाओं को लेकर बातें राज्य से लेकर केंद्र तक जाती रहती है। इन मसलों पर देखा जाता है कि जब शहर के विकास के लिए राशि की आवंटन होती है। परंतु सरकार विभाग के द्वारा टेंडर पास कराती है डीपीआर अपने माध्यमों से वैसे ठेकेदार को दिया जाता है। जहां से कार्यों को अंतिम चरण तक अंजाम देने में अक्षम हो जाते हैं। फिर भी वैसे ठेकेदारों को टेंडर पास नहीं करानी चाहिए पता नहीं किस दबाव में आकर इस तरह का निर्णय लिया जाता है। जिसे पैसे तो खर्च हो जाते हैं टेंडर तो पास हो जाते हैं। परंतु जलजमाव की समस्या समाप्त नहीं होती है तो इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार की कोई नई पहल करनी चाहिए।

जैसे सरकार ने टेंडर निकालने की प्रक्रिया शुरू की है उसमें माना जा रहा है। कि 121 किलोमीटर ड्रेनेज और लगभग 88 किलोमीटर सीवरेज पाइप लाइन बिछाने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन इस प्रक्रिया में कितनी सच्चाई है जिसे पूरा किया जा सके और इस योजना से शहर मुजफ्फरपुर को स्मार्ट सिटी एरिया 1210 एकड़ में सीवरेज व ड्रेनेज पाइप लाइन बिछाकर शहर को सुदृढ़ किया जा सके। यह तो आने वाले वक्त ही बताएंगे पानी को बाहर निकालने के लिए तीन रास्ते हैं शहर के पानी बूढ़ी गंडक जो कि शहर के उत्तर दिशा से गुजरती है पश्चिम और दक्षिण में फल्गु नदी एवं दक्षिण में बूढ़ी गंडक का ही एक बांध है जिसे तिरोत बांध भी कहा जाता है। तो एक माध्यम है जिससे जल को बाहर निकाल किया जा सकता है। परंतु सरकार जो योजनाएं पास कराती है। शहर की विकास के लिए नल नालों के लिए जो किस शहर में नल की नाला की स्थिति बद से बदतर है। शहर की नाला करीब-करीब 70% तो क्षतिग्रस्त है 30% नाला सही भी है तो उसे निकासी के लिए व्यवस्था नहीं किया जा रहा है। जिसे जल को शहर से बाहर निकाला जा सके ऐसी परिस्थिति में शहर को स्मार्ट सिटी के तौर पर कैसे देखा जा सकता है और शहर को स्मार्ट सिटी का निर्माण कैसे किया जा सकता है।

जब तक जल कचरा पूरा को शहर से बाहर न किया जाए पार्किंग की व्यवस्था न किया जाए तब तक स्मार्ट सिटी का संभव नहीं माना जा सकता है स्मार्ट सिटी के लिए शहरों में ट्रैफिक रूल का पालन न करना जिसे ट्राफिक परेशानी होती है। ट्राफिक से मुक्ति पाने के लिए सरकार को अपने विधि व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नियम संगत कानून तैयारी करनी होगी और यहां के जिला अधिकारी एवं जुड़े अधिकारियों को भी चुस्त और दुरुस्त होना होगा। तब जाकर ही हम स्मार्ट सिटी का निर्माण कर पाएंगे सुखी स्मार्ट सिटी का निर्माण होने के बाद शहर का सम्मान भी बढ़ेगा। और यहां तरह-तरह के पर्यटक स्थल जाने को लेकर देश विदेश के लोग यहां ठहरे हुए और राज्यों को गौरवान्वित महसूस कर आएंगे। अक्सर में देखा जाता है। जहां स्मार्ट सिटी वोट की मांग पर दोबारा भेजी गई डीपीआर का यह रिपोर्ट शहर में पानी लेवल को साफ सफाई को लेकर अपनी सफाई देते हुए डीपीआर ने केंद्र को सौंपी अपनी रिपोर्ट पूर्व में दिए गए रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा दिया गया है। जहां स्मार्ट सिटी की बात होती है वहां बड़े बड़े अधिकारी मंत्री अपने-अपने कार मात भी दिखाते हैं जैसे शहर की दुर्दशा पर कमिश्नर से मिला प्रतिनिधिमंडल ने जलजमाव शहर की गंदगी पर चर्चा की गई। कमिश्नर का भी दायित्व होता है कि शहर को स्मार्ट कैसे बनाएं इसमें उनका भी योगदान होना चाहिए और उन्हें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।

क्योंकि शहर मुजफ्फरपुर नॉर्थ बिहार की सबसे बड़ा शहर और राज्य की उपराजधानी भी मानी जाती है तो इस पर कमिश्नर को भी एक्शन लेना चाहिए। जिससे हमारे शहर की साफ-सफाई विधि व्यवस्था चुस्त और दुरुस्त हो सके जिसे हम स्मार्ट सिटी पाने का सपना पूरा हो सकता है। शहर वासियों से भी यह आग्रह किया जा सकता है क्योंकि जब हम साथ रहेंगे तो मेरे नजदीक आने वाले लोग साथ ही होंगे जब हम अच्छे रहेंगे। तो हमारे समीप अच्छे लोग जरूर आएंगे तो इसमें शहर वासियों का योगदान होना चाहिए क्योंकि बरसों से शहर के लोगों ने टकटकी लगाए बैठे हैं कि हमारे शहर मुजफ्फरपुर भी स्मार्ट सिटी के दौर में है और जब हम स्मार्ट सिटी का निर्माण करेंगे। तो हमारी शहर का भी नाम आगे जाएगा और देश में अपना स्थान प्राप्त करेगा शहर के कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां 365 दिन पानी लगे रहते हैं जिसमें कुछ बेला क्षेत्र का नाम आता है हमारे मुजफ्फरपुर के स्टेशन के इर्द-गिर्द में भी 365 दिन जल जमाव की समस्या बनी हमारे मुजफ्फरपुर शहर के इस्लामपुर मार्केट देश के मार्केट के नामों में आते हैं सूतापट्टी जो भारत के अलावा कई और देशों में भी इस मार्केट का नाम प्रचलित है। इससे हमारे शहर का नाम रोशन होता है और हमें गौरवान्वित महसूस करना होगा। कि हमारे मुजफ्फरपुर जलजमाव से मुक्ति पाकर स्मार्ट सिटी जल्द से जल्द तैयार हो सके।

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