अब नियोजित शिक्षक प्रधानाध्यापक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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अभी तत्काल में बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने एलान जारी कर दिया है। कि अब नियोजित शिक्षक जो वर्तमान में कार्यरत हैं। वह भी बीपीएससी के तहत प्रधानाध्यापक पद पर आसीन हो सकते हैं। जो नियोजित शिक्षक डीपी डीएलएड प्रशिक्षित शिक्षक हैं वह भी इस बीपीएससी प्रधानाध्यापक पद के लिए आवेदन कर सकते हैं तो आप इसे समझ सकते हैं। कि अब नियोजित शिक्षक भी प्रधानाध्यापक बन सकते हैं लेकिन यह आशय का पता अभी तक नहीं चला है। कि क्या नियोजित शिक्षक जब बीपीएससी करके आएंगे तो उनकी नौकरी उस तिथि से मानी जाएगी और सेवा पुस्तिका पर अंकित की जाएगी। या अभी वर्तमान में जिस तिथि से नियोजित हैं नियुक्त हुए हैं सेवा पुस्तिका में उसे ही माना जाएगा। यह अभी विचार नहीं है। तब आप समझ सकते हैं कि नियोजित शिक्षक 18 वर्ष विभाग में प्रोन्नत के बगैर सेवा में कार्य कर रहे निष्ठा पूर्वक पूरे अपने ईमानदारी के साथ इतने वर्षों के बाद भी तुरंत नहीं मिली और आज जब तुरंत मिल रही है तो परीक्षा देनी पड़ रही है। तो आप इसे समझ सकते हैं कि क्या बीपीएससी से नियुक्त कर प्रधानाध्यापक पद पर आसीन कराना कहीं न कहीं नियोजित शिक्षकों की अपमान की जा रही है। सरकार बिल्कुल नहीं सोचेगी की कि जिन नियोजित शिक्षकों ने 18 वर्ष तक अपनी सेवा शिक्षा विभाग में देने के बाद भी उन्हें तुरंत नहीं दी गई।

और जब उन्हें तुरंत मिलने की उम्मीद जगी नियमावली बनी। फिर नियमावली में बदलाव होकर यह परीक्षा का विषय बन गया ऐसा करने से जो नियोजित शिक्षक जिनकी योग्यता और जिन्होंने विद्यालय तक ही सीमित रह गए। वह भला क्या बीपीएससी बात कर पाएंगे बीपीएससी से परीक्षा लेने के उद्देश्य पर सरकार किस तरह से ले रही है और कैसे यह किया जाएगा। कि प्रधानाध्यापक पद के लिए डीटीसी पास करना क्या आसान बात है जब पढ़ाई छोड़ा हुआ 20 वर्ष हो गया तो क्या नियोजित शिक्षक बीपीएससी पास कर पाएंगे। बिल्कुल नहीं सरकार पूरी तरह से जान रही है बीपीएससी से जो उम्मीदवार शिक्षा विभाग में आएंगे। उन्हें प्रधानाध्यापक पद पर आसीन करेंगे लेकिन वह शायद नहीं समझ रहे हैं। कि जो प्रधानाध्यापक के पद पर आएंगे बीपीएससी से पास होकर क्या वह विद्यालय को संचालित कर पाएंगे ऐसा अगर सरकार मानती है। तो यह बिल्कुल गलत है क्योंकि जिसे 18 वर्षों की अनुभव कम से कम 5 वर्षों के अनुभव बाले शिक्षक नवनियुक्त प्रधानाध्यापकों से विद्यालय संचालित हो पाएंगे हां यह बात सही है। कि परीक्षा होनी चाहिए लेकिन बीपीएससी से ही क्यों दूसरे भी तरीका हो सकते हैं।

आज नियोजित शिक्षकों को दक्षता परीक्षा देकर विभाग में दोबारा रुकने के लिए उन्हें पास करना पड़ा है। इस तरह की विभागीय परीक्षा होनी चाहिए जब परीक्षा ही लेनी थी तो विभागीय स्तर से लिया जा सकता है। जैसा कि दूसरे विभागों में प्रमोशन के लिए परीक्षा देकर आते हैं। तो उसी प्रकार शिक्षा विभाग में भी पदोन्नति के लिए विभागीय परीक्षा होनी चाहिए। हम सभी नियोजित शिक्षक यह मानते हैं कि परीक्षा के बाद ही प्रोन्नति होनी चाहिए लेकिन इसकी भी समय सीमा होती है। जब आप समय सीमा को लांग देते हैं और फिर कैडर बदल देते हैं कि अब नियोजित नहीं बीपीएससी से पास होकर आने के बाद ही आप को पदोन्नति दी जाएगी। तू इस तरह की प्रक्रिया में थोड़ी असमानता तो हो ही जाती है इस असमानता को दूर करने के लिए सरकार और विभाग को जरूर सोचना चाहिए। और उन्हें विचार करनी चाहिए कि क्या साहब जिन शिक्षक कर्मचारी ने आपके विभाग की शिवा 18 वर्ष तक लगातार शिवा प्रदान किया है। वैसे शिक्षक कर्मचारियों को बगैर प्रोन्नति के आप समय बिताते गए 18 वर्ष में कम से कम 2 बार प्रोन्नति तो जरूर ही होनी चाहिए थी। नियम संगत के अनुसार 8 वर्ष 10 वर्ष 20 वर्ष का माना गया है तू ऐसी परिस्थितियों में शिक्षकों को किसी प्रकार की पदोन्नति नहीं दी गई।

आज पदोन्नति के नाम पर उन्हें अपमान किया जा रहा है ऐसा किसी भी भाग में नहीं हुआ है कि प्रोन्नति के लिए जनरल कैडर छोड़कर बीपीएससी के तहत एग्जाम लेकर प्रोन्नति के पद को भरा जाए तू इसी तरह सभी विभागों में करनी चाहिए। आप किस प्रकार से अन्य विभागों में प्रोन्नति विभागीय परीक्षा के आधार पर दे देते हैं। आप विभागीय परीक्षा लीजिए और प्रोन्नति दीजिए वरना यह एक बड़ा आंदोलन का रुख अपनाया जा सकता है। इस कैडर को देखते हुए सभी अपने शिक्षक संघ ने इस पर बड़ी मंथन करनी चाहिए। और इस विभाग के द्वारा दिया गया। निर्देशों का पालन ना कर इस पर आंदोलन होना चाहिए। जब आंदोलन होगा तब जाकर सरकार होश में आएगी। अपनी हठधर्मिता को त्याग एगी जब तक यह सरकार शिक्षकों के हित में कार्य नहीं करता है। तब तक आंदोलन जारी रहना चाहिए। आज बार-बार कहने के बाद भी सरकार अपनी हठधर्मिता का परिचय दे रही है। जहां तक की बात बीपीएससी की है तू अंतर्गत वा शिक्षक तो परीक्षा देंगे ही और जब आपने टीईटी एसटीईटी सीटीईटी कैडर को लागू किया। तो फिर क्या वजूद इससे यह साबित होती है कि आपके द्वारा लिए गए टीईटी परीक्षा का कोई और चित्र नहीं आपने यह क्षमता नहीं है। कि आप अपने विश्वास पर कायम नहीं हैं और अपने आप में यह क्षमता नहीं है कि हमने जो बहाल किया है शिक्षकों का आपको उन पर भरोसा नहीं है।

जब आपको अपने पर भरोसा नहीं है। तो फिर इस तरह तरह की कदर टुकड़े टुकड़े में बैठकर शिक्षकों को क्यों परेशान और अपमान करते हैं। आप अपनी हठधर्मिता को छोड़ शिक्षकों को अभी से भी सम्मान देने का पहुंचे। सम्मान देने पर विचार करें तब जाकर शिक्षक राष्ट्र का निर्माण करने में सफल होंगे। जवाब शिक्षकों को सम्मान नहीं देंगे। उन्हें इज्जत नहीं देंगे तो अच्छे राष्ट्र का निर्माण कैसे संभव हो सकता है। आप जब एक बार उन्हें शिक्षक बना दिए आप अपने कार्यकाल में तकरीबन चार लाख शिक्षक का बहाली कराया क्या बिहार के सारे चार लाख नियोजित शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बहुत नहीं अच्छा रहते हुए भी शिक्षक अपने कर्तव्य पर बने रहते हैं। अपने परिवार की सुख सुविधा के बगैर विद्यालयों में जाकर अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहते हैं। लेकिन सरकार शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है वेतन भुगतान समय से नहीं होती है। फिर भी सरकार इस पर कोई विचार नहीं सकती है और जब आज समय आया है। अपने कर्तव्य पर बने रहकर सेवा की प्रतिपूर्ति के बाद प्रोन्नति पाने की तो सरकार प्रोन्नति विभागीय परीक्षा ना लेकर बीपीएससी के द्वारा लेने का फैसला लिया है।

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