अब देश में राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों के शिक्षण कार्य में होगी बदलाव।

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देश में राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकारी एवं निजी विद्यालयों में पठन-पाठन को लेकर नई शिक्षा नीति के आधार पर बहुत बड़े बदलाव किए गए हैं। इस बदलाव से देश के सभी वर्गों के बच्चों के पठन-पाठन को लेकर सुविधाजनक साबित होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता वाली नई शिक्षा नीति कानून जो लागू किया गया था उसे विस्तार करने के लिए अब हमारे वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस नीति को आगे की तरफ बढ़ाने की पूर्ण क्षमता के साथ विकसित करने को लेकर अपना लक्ष्य पूरा करने को तैयार है। देश के विभिन्न राज्यों से नई शिक्षा नीति को लेकर उत्साहवर्धन का कार्य होगा। इसी बीच कुछ राज्यों ने नई शिक्षा नीति में हुए बदलाव पर आपत्ति दर्ज किया था। जिस पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने हर संभव इन सारी समस्याओं को समाधान करने का बीड़ा उठाया। और उन्होंने उस समस्याओं के निदान को खत्म किया समस्या का समाधान हो जाने के उपरांत अचानक मंत्रियों का बदलाव होने के बाद रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया तत्पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में पुनः मंत्रियों का गठन हुआ। जिसमें अभी वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद ग्रहण करने के बाद नई शिक्षा नीति के तहत उन्होंने शिक्षा पर बल देते हुए आगे शिक्षा में उन्नति का संकल्प लिया। अपने कार्य को आगे बढ़ाते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति को पूर्णरूपेण लागू करने का संकल्प लिया।

लेकिन इसी बीच कोरोनावायरस महामारी को लेकर शिक्षण कार्य पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो जाने से नई शिक्षा नीति के तहत लागू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अंततोगत्वा दूसरी लहर समाप्त होने के बाद देश के विभिन्न राज्यों में अनलॉक प्रथम द्वितीय तृतीय चतुर्थ एवं कहीं-कहीं पंचम अनलॉक की प्रक्रिया चलाई गई। आज धीरे-धीरे पूरे देश में कोरोनावायरस से निजात पाने के बाद करीब करीब 60% राज्यों ने अपने प्रश्न 5 पठन-पाठन कार्य प्रारंभ करने की प्रक्रिया के तरफ अग्रसर हो गए। जब पठन-पाठन प्रक्रिया शुरू होने लगी किसी किसी राज्य में अगस्त किसी राज्य में सितंबर कुछ ऐसे राज्य हैं। जहां अभी तक अनलॉक प्रक्रिया चल रही है। वहां विद्यालय को नहीं खोला गया है किसी राज्यों में केवल उच्च कक्षा जैसे 11वीं 12वीं यूनिवर्सिटी को खोल दिया गया है। तो कहीं नवमी एवं दशमी को खोला गया है उसी प्रकार बिहार में पहले 12वी यूनिवर्सिटी एवं नवमी दसवीं तत्पश्चात पांचवी से आठवीं आज पहली से लेकर 12वीं तक के कक्षा विधिवत संचालित हो रही है। 26 अगस्त 2021 से 100% की क्षमता के अनुसार विद्यालय की कक्षाओं को संचालन करने का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा आदेश कर दिया गया। 25 अगस्त से पहले 8 अगस्त से जो विद्यालय खोली गई। उसमें 50% के आधार पर ही बच्चों को विद्यालयों में उपस्थित होना अनिवार्य किया गया था। खुलने के उपरांत प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कोविड-19 के प्रोटोकॉल के आधार पर सभी विद्यालयों के वर्ग कक्ष को सैनिटाइज कर 2 गज की दूरी के अनुसार बच्चों को ही बैठने की अनुमति मिली थी।

आज बिहार में कोरोनावायरस महामारी से लोग कुछ निजात पाकर अपने अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए सभी अपने-अपने प्रतिष्ठान को पूर्व की तरह चलाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन बिहार में अधिक वर्षा होने के कारण शहर के कुछ बड़े क्षेत्रों में समस्याओं से घिरे हुए हैं। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए सरकारी अफसरों ने एड़ी से चोटी लगाकर अपने कार्य को संपादित करने के लिए कटिबद्ध है। आज देश को रोना मना मारी की आर्थिक स्थिति से गुजरने के बाद जब संभलने का समय आया तो अचानक अत्यधिक बारिश होने से पूरे देश में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। परंतु सरकार इससे निजात पाने के लिए तरह तरह की योजनाओं का शिलान्यास किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्री कौन है बिहार में जब पठन-पाठन की कार्य शुरू हुई इसी बीच बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने वर्ग कक्ष के संचालन के अनुरूप कुछ नए नियमों का भी उन्होंने उल्लेख कर विभाग से आग्रह किया और कोरोनावायरस महामारी से छुटकारा पाने के बाद बच्चों के 2 साल से पढ़ाई बाधित होने के उपरांत मंत्री ने यह निर्णय लिया। कि बच्चों को 6 महीने का कोर्स 1 महीने में केचप कोर्ट के माध्यम से उन्हें सिलेबस को छोटा कर मुख्य-मुख्य बिंदुओं को पढ़ाकर बच्चों की कमी को पूरी की जा सके। इस केचप कोर्स को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षण भी दिया गया। कुछ मास्टर ट्रेनों को ट्रेनिंग देकर उन्हें दक्ष किया गया जहां शिक्षकों के द्वारा बच्चों को विद्यालयों में वर्ग कक्ष में केचप कोर्स के माध्यम से बढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई गई।

लेकिन अप्रैल 2000 मई 2021 में कोरोनावायरस की दूसरी लहराने के बाद स्केच ऑफ कोर्स को शुरू ही नहीं की गई। दूसरी लहराने से अधिक प्रभाव पड़ा और बिहार में अचानक रोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ गई। जिससे विद्यालय को पुनः बंद कर दिया गया और बच्चे घर में बंद हो गए। ऑनलाइन की प्रक्रिया जारी रखी गई परंतु उच्च वर्ग के कक्षा में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को निजी करण विद्यालयों के बच्चों को ऑनलाइन की शिक्षा दी गई। जबकि सरकारी विद्यालयों के बच्चों के लिए डीडी नेशनल पर बच्चों की पढ़ाई शुरू की गई। कुछ बच्चों ने ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई जिसमें गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर जो परिवार के बच्चे हैं। उनके घर परिवार में टीवी नहीं रहने के कारण उन्हें ऑनलाइन क्लास की सुविधा नहीं मिल पाई। सरकार ने पुनः स्थिति सामान्य होने के बाद विद्यालय खोलने का निर्णय लिया। आज विद्यालय खुल गया परंतु बच्चों के हाथों में किताब अब तक नहीं पहुंच सके सरकार के इन नई नीति के कारण बच्चे के हाथों में बगैर किताब के ही पढ़ाई की जा रही है। पहले की स्थिति में संकुल आधीन सभी संकुल पर संकुल आधीन विद्यालय में नामांकित बच्चों के आधार पर संकुल तक विद्यालय के बच्चों को किताब पहुंचा दी जाती थी। उसके उपरांत शिक्षक संकुल से प्राप्त कर अपने विद्यालय के बच्चों तक पहुंचा देते थे। लेकिन आज बन चुकी है कि सरकार खर्च तो कर रही है। लेकिन बच्चों के नजदीक किताब नहीं पहुंच पा रही है। कुछ ऐसे प्रकाशन है जो अभी तक छपाई भी नहीं शुरू किए हैं जिसके सहारे बिहार की शिक्षा व्यवस्था चल रही है। तो ऐसी परिस्थिति में नई शिक्षा नीति लागू होने का क्या मतलब जब बच्चे तक पुस्तक ही नहीं पहुंचे।

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